रीवा लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद बड़ा खुलासा, एक साथ श्योपुर, खरगोन और शहडोल में दर्ज रही पदस्थापना; स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप
रीवा। रीवा लोकायुक्त द्वारा 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए गए मेडिकल ऑफिसर डॉ. महेश चंद्र शर्मा से जुड़ा एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच में पता चला है कि उनकी एक ही समय में मध्य प्रदेश के तीन अलग-अलग जिलों में पदस्थापना दर्ज थी। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 से डॉ. शर्मा की पदस्थापना श्योपुर जिले के विजयपुर ब्लॉक में संविदा मेडिकल ऑफिसर के रूप में थी। इसके बाद वर्ष 2023 में उनकी नियुक्ति खरगोन जिले के सेगांव ब्लॉक स्थित केली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी दर्ज हुई। वहीं वर्ष 2024-25 के दौरान उनकी पदस्थापना शहडोल जिले के जयसिंहनगर विकासखंड के उफरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी हो गई।
खरगोन से मिली जानकारी के अनुसार, डॉ. शर्मा लंबे समय तक अनुपस्थित रहे। 8 जून को एक डिलीवरी केस के दौरान भी वे अस्पताल में मौजूद नहीं थे, जिसके बाद जिला प्रशासन ने उनके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की थी।
बताया जा रहा है कि तीनों जिलों में समय-समय पर उनकी वीआईपी ड्यूटी भी लगाई जाती रही, लेकिन किसी स्तर पर उनकी दोहरी या तिहरी पदस्थापना का मामला सामने नहीं आया। इससे विभागीय निगरानी प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।
शहडोल में सार्थक ऐप पर उनकी उपस्थिति लगातार कम दर्ज होने के कारण पिछले कुछ महीनों से उनका वेतन भी रोक दिया गया था। उपस्थिति की जांच के दौरान ही पूरे मामले का खुलासा हुआ।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश मिश्रा ने बताया कि संबंधित जिलों से डॉ. शर्मा का सेवा रिकॉर्ड मांगा गया है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि रीवा लोकायुक्त की टीम ने हाल ही में जयसिंहनगर बस स्टैंड पर डॉ. महेश चंद्र शर्मा को 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। अब उनकी कथित तिहरी पदस्थापना और वेतन भुगतान की भी जांच शुरू हो गई है। जांच पूरी होने के बाद पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी स्पष्ट हो सकेगी।











