जुगाड़’ से बन रहे आरआई? राजस्व विभाग में प्रभार का खेल सवालों के घेरे मे
पटवारियों को नियमों से परे राजस्व निरीक्षक (आरआई) का प्रभार दिए जाने के आरोप, अवैध वसूली की शिकायतों के बीच निष्पक्ष जांच की मांग तेज
जबलपुर। राजस्व विभाग में राजस्व निरीक्षक (आरआई) का प्रभार दिए जाने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ पटवारी कथित रूप से प्रभाव, सिफारिश और जुगाड़ के दम पर आरआई का अतिरिक्त प्रभार हासिल कर लेते हैं। इसके बाद राजस्व मामलों में उनका प्रभाव बढ़ जाता है और आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
लोगों का आरोप है कि आरआई का प्रभार मिलने के बाद नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और अन्य राजस्व प्रकरणों में मनमानी बढ़ जाती है। कई मामलों में बिना “सुविधा शुल्क” के फाइलें आगे नहीं बढ़ने की शिकायतें भी सामने आती हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नियमित राजस्व निरीक्षक उपलब्ध हैं, तो आखिर किन परिस्थितियों में पटवारियों को आरआई का प्रभार सौंपा जाता है? क्या इसके लिए निर्धारित नियमों और मापदंडों का पालन किया जाता है, या फिर प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए व्यवस्था का दुरुपयोग हो रहा है?
जबलपुर में भी ऐसे मामलों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि पिछले कुछ वर्षों में किन-किन पटवारियों को आरआई का प्रभार दिया गया, किस आदेश के आधार पर दिया गया और उस अवधि में उन्होंने किन-किन राजस्व प्रकरणों का निस्तारण किया, इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
यदि जांच में यह सामने आता है कि नियमों की अनदेखी कर प्रभार दिए गए या पद का दुरुपयोग कर अवैध लाभ अर्जित किया गया, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या राजस्व विभाग इस ‘प्रभार के खेल’ की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?












