प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान: जयपुर द्वितीय में गर्भवतियों की स्वास्थ्य जांच, एनीमिया उपचार के लिए लगाए गए एफसीएम इंजेक्शन

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जयपुर | 09 जुलाई। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत गुरुवार को जयपुर द्वितीय जिले के विभिन्न सरकारी चिकित्सा संस्थानों में विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए गए। अभियान के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों ने गर्भवती महिलाओं की विस्तृत स्वास्थ्य जांच की, उच्च जोखिम (हाई-रिस्क) गर्भधारण वाले मामलों की पहचान की तथा उन्हें आवश्यक उपचार, परामर्श और नियमित फॉलोअप की सुविधा उपलब्ध कराई। इसके साथ ही एनीमिया से पीड़ित गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज (एफसीएम) इंजेक्शन लगाए गए, ताकि आयरन की कमी को दूर कर सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) जयपुर द्वितीय डॉ. मनीष मित्तल ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा अन्य सरकारी चिकित्सा संस्थानों पर बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं ने स्वास्थ्य जांच कराई। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना, संभावित जटिलताओं की पहचान करना तथा सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना है।

उन्होंने बताया कि शिविरों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने गर्भवती महिलाओं की संपूर्ण स्वास्थ्य जांच की। जांच के दौरान महिलाओं का रक्तचाप (बीपी), रक्त शर्करा (ब्लड शुगर), वजन, लंबाई, हीमोग्लोबिन स्तर, रक्त जांच, एचआईवी जांच तथा गर्भस्थ शिशु की हृदय गति (फीटल हार्ट रेट) सहित कई आवश्यक परीक्षण किए गए। इन जांचों के आधार पर जिन महिलाओं में किसी प्रकार का स्वास्थ्य जोखिम पाया गया, उन्हें हाई-रिस्क श्रेणी में चिन्हित कर आवश्यक उपचार और नियमित निगरानी की व्यवस्था की गई।

एनीमिया से बचाव पर विशेष जोर

स्वास्थ्य विभाग ने इस बार अभियान के दौरान एनीमिया नियंत्रण को विशेष प्राथमिकता दी। जांच के दौरान जिन गर्भवती एवं धात्री महिलाओं में आयरन की गंभीर कमी पाई गई, उन्हें चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज (Ferric Carboxymaltose – FCM) इंजेक्शन लगाए गए। विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान एनीमिया मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। समय पर उपचार मिलने से प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

डॉ. मनीष मित्तल ने बताया कि एनीमिया की रोकथाम के लिए महिलाओं को नियमित रूप से आयरन-फोलिक एसिड (आईएफए) की गोलियां लेने, संतुलित आहार अपनाने तथा निर्धारित समय पर स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह भी दी गई।

मां वाउचर योजना का लाभ

अभियान के दौरान पात्र गर्भवती महिलाओं को मां वाउचर योजना के तहत सोनोग्राफी कराने के लिए मां वाउचर भी वितरित किए गए। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर गर्भवती महिलाओं को समय पर आवश्यक जांच उपलब्ध कराना है, ताकि गर्भावस्था के दौरान किसी भी प्रकार की जटिलता का समय रहते पता लगाया जा सके और उचित उपचार सुनिश्चित किया जा सके।

पोषण और सुरक्षित मातृत्व पर दी गई जानकारी

शिविरों में उपस्थित चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने गर्भवती महिलाओं को केवल दवाइयों तक सीमित न रखते हुए सुरक्षित मातृत्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं की भी जानकारी दी। महिलाओं को बताया गया कि गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक एवं संतुलित भोजन, पर्याप्त आराम, नियमित व्यायाम, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय सलाह का पालन करना मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।

महिलाओं को हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, दूध, दही, मौसमी फल, अंकुरित अनाज तथा आयरन और कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थों को दैनिक भोजन में शामिल करने की सलाह दी गई। साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और तंबाकू एवं अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने की भी अपील की गई।

आवश्यक दवाओं का किया गया वितरण

स्वास्थ्य विभाग की ओर से शिविर में आने वाली गर्भवती महिलाओं को आयरन-फोलिक एसिड (आईएफए), कैल्शियम, फोलिक एसिड तथा अन्य आवश्यक दवाइयां निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं। चिकित्सकों ने महिलाओं को इन दवाओं का नियमित सेवन करने और किसी भी प्रकार की असामान्य समस्या होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की सलाह दी।

हाई-रिस्क गर्भधारण की पहचान पर फोकस

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत उन महिलाओं की विशेष निगरानी की जाती है जिनमें उच्च रक्तचाप, मधुमेह, गंभीर एनीमिया, कम उम्र या अधिक उम्र में गर्भधारण, पूर्व में जटिल प्रसव अथवा अन्य चिकित्सकीय समस्याएं होती हैं। ऐसे मामलों में समय रहते उपचार और रेफरल की व्यवस्था कर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने का प्रयास किया जाता है।

नियमित जांच से मिलती है सुरक्षित गर्भावस्था

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार गर्भावस्था के दौरान प्रत्येक महिला को नियमित अंतराल पर प्रसव पूर्व जांच (ANC) करानी चाहिए। समय पर जांच होने से गर्भस्थ शिशु के विकास की निगरानी की जा सकती है तथा किसी भी प्रकार की संभावित जटिलता का समय रहते उपचार संभव हो जाता है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर संचालित किया जा रहा है।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के माध्यम से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषण संबंधी परामर्श, आवश्यक दवाओं का वितरण तथा हाई-रिस्क गर्भधारण की समय पर पहचान से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिल रही है। विभाग ने सभी गर्भवती महिलाओं से अपील की है कि वे प्रत्येक निर्धारित तिथि पर स्वास्थ्य संस्थान पहुंचकर अपनी जांच अवश्य कराएं और सुरक्षित मातृत्व के लिए चिकित्सकीय सलाह का पालन करें।

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