पटवारी पर भारी पड़े बिचौलिए, ऑनलाइन व्यवस्था भी नहीं रोक पाई भ्रष्टाचार
राजस्व विभाग में दलालों का बोलबाला, नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन के लिए वसूली के आरोप
भोपाल। प्रदेश में राजस्व सेवाओं को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था लागू की गई थी, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। प्रदेश के कई जिलों में पटवारी कार्यालयों के बाहर अब भी बिचौलियों का नेटवर्क सक्रिय है। आम नागरिकों का आरोप है कि नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, नक्शा सुधार और अन्य राजस्व कार्य बिना दलालों की मदद के समय पर नहीं हो पाते।
लोगों का कहना है कि ऑनलाइन आवेदन करने के बाद भी फाइलें लंबे समय तक लंबित रखी जाती हैं। इसके बाद बिचौलिए मोटी रकम लेकर काम जल्दी कराने का भरोसा दिलाते हैं। इससे सरकार की डिजिटल व्यवस्था और पारदर्शिता के दावों पर सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल ऑनलाइन व्यवस्था लागू कर देने से भ्रष्टाचार समाप्त नहीं होगा। जब तक बिचौलियों पर सख्त कार्रवाई, जवाबदेही तय करने की व्यवस्था और नियमित निगरानी नहीं होगी, तब तक आम जनता को राहत मिलना मुश्किल है।
राजस्व विभाग का कहना है कि शिकायत मिलने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, लेकिन नागरिकों की मांग है कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे लोगों को सीधे सरकारी सेवाएं मिलें और दलालों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो सके।












