एलुमनी मीट–2026: जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय में कृषि नवाचार और विज़न–2047 पर व्यापक मंथन

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जोबनेर ,अजय सिंह (चिंटू)। राजस्थान के प्रतिष्ठित श्री कर्ण नरेंद्र कृषि महाविद्यालय, जोबनेर में एलुमनी मीट–2026 का भव्य और गरिमामय आयोजन किया गया। इस अवसर पर देशभर से आए पूर्व छात्र, वरिष्ठ शिक्षाविद, वैज्ञानिक और कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ एक मंच पर जुटे, जिससे महाविद्यालय एक बार फिर राष्ट्रीय कृषि विमर्श का केंद्र बन गया। कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय के प्रेरणास्रोत श्री कर्ण नरेन्द्र जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि कृषि नवाचारों को धरातल पर उतारने में कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने ड्रिप इरीगेशन, वाटर पॉन्ड, जल संरक्षण और मृदा सुधार जैसी योजनाओं को किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप प्रभावी ढंग से लागू करने पर बल दिया। मुख्य सचिव ने आधुनिक सिंचाई तकनीकों और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन को किसानों की आय बढ़ाने का अहम माध्यम बताया। साथ ही, विश्वविद्यालय की नई वेबसाइट और पेंशनर्स पोर्टल को डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में सराहनीय कदम बताया।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) के सचिव डॉ. एम. एल. जाट ने विश्वविद्यालय की विभिन्न इकाइयों का भ्रमण कर शैक्षणिक, अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा और किसानों की वर्तमान चुनौतियों के अनुरूप शोध आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। डॉ. जाट ने विज़न–2047 को साकार करने के लिए समग्र और दीर्घकालिक रणनीति अपनाने पर जोर दिया तथा आत्ममंथन और कार्य-मूल्यांकन की संस्कृति को संस्थानों के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने भारतीय कृषि विरासत के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और डिजिटलाइजेशन को भविष्य की पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण बताया।

इस अवसर पर कुलगुरु डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि विश्वविद्यालय प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए ठोस रोडमैप पर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकों के जरिए अनुसंधान, प्रशिक्षण और विस्तार गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है, जिससे किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

कार्यक्रम में भारतीय किसान संघ के मंत्री गजेंद्र सिंह ने महाविद्यालय की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान को रेखांकित किया। एलुमनी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. संग्राम सिंह ने पूर्व छात्रों का परिचय कराते हुए संस्थान के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला।

एलुमनी मीट–2026 के दौरान वर्ष 1985 से पूर्व स्नातक डिग्री प्राप्त करने वाले वरिष्ठ पूर्व छात्रों सहित कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कुल 109 पूर्व छात्रों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक नृत्य के साथ हुआ, जिसे उपस्थितजनों ने सराहा। अंत में अधिष्ठाता एवं संकाय अध्यक्ष डॉ. डी. के. गोठवाल ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

एलुमनी मीट में देशभर से जुटे पूर्व छात्रों और विशेषज्ञों की मौजूदगी ने यह स्पष्ट किया कि जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय न केवल शिक्षा का केंद्र है, बल्कि भविष्य की कृषि नीति और नवाचारों के लिए भी एक प्रभावशाली मंच बन चुका है।

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