राजौला बालिका छात्रावास अग्निकांड: आग बुझी, सवाल अब भी धधक रहे

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राजौला बालिका छात्रावास अग्निकांड: आग बुझी, सवाल अब भी धधक रहे

सतना/चित्रकूट। चित्रकूट के राजौला स्थित सुभाष चंद्र बोस बालिका छात्रावास में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब घटना से ज्यादा प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आग की लपटों ने छात्रावास में छात्राओं का सामान खाक कर दिया और बच्चियां बाल-बाल बचीं, लेकिन घटना के कई दिन बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने से प्रशासनिक व्यवस्था कटघरे में है।

 

जांच कहां है, कार्रवाई कब होगी?

 

घटना के बाद जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच और कार्रवाई की मांग लगातार उठ रही है। सवाल यह है कि छात्रावास जैसी संवेदनशील जगह पर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी और घटना के बाद अब तक जवाबदेही क्यों तय नहीं हुई?

 

स्थानीय नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि मामले में जांच की गति बेहद धीमी है और विभागीय स्तर पर लीपापोती की जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अब निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

 

DEO-DPC की भूमिका पर उठे सवाल

 

मामले में जिला शिक्षा अधिकारी और डीपीसी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि यदि समय रहते छात्रावास की व्यवस्थाओं और सुरक्षा मानकों की निगरानी की जाती तो नुकसान को कम किया जा सकता था।

 

सबसे बड़ा सवाल यही है कि छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा हुई थी या नहीं? अग्निशमन उपकरण उपलब्ध थे या नहीं? विद्युत व्यवस्था की जांच कब हुई थी? और घटना के बाद जिम्मेदारी तय करने के लिए विभाग ने क्या कदम उठाए?

 

राजनीतिक दलों ने खोला मोर्चा

 

भाजपा मंडल अध्यक्ष विनीता शिवहरे ने घटना की तत्काल जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता रितेश त्रिपाठी ने कहा कि हॉस्टल प्रबंधन और लापरवाह अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए नोटशीट तैयार की जा रही है और कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।

 

ओबीसी विंग के प्रदेश सचिव राजाराम यादव ने प्रशासन पर मामले में लीपापोती का आरोप लगाते हुए जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की। भाजपा जिला उपाध्यक्ष राव प्रवल श्रीवास्तव ने कहा कि विभागीय लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है।

 

नगर परिषद चित्रकूट की अध्यक्ष साधना पटेल ने भी जांच में देरी पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी। किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव आशुतोष द्विवेदी ने छात्रावास प्रबंधन और प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। वहीं पूर्व बसपा प्रत्याशी सुभाष शर्मा डोली ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होने पर कार्यालय घेराव की चेतावनी दी।

 

बच्चियों की सुरक्षा पर सबसे बड़ा सवाल

 

यह महज आगजनी की घटना नहीं है। यह सवाल है कि सरकारी छात्रावासों में रहने वाली बच्चियों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी गंभीरता से ली जा रही है। यदि जांच में लापरवाही, सुरक्षा मानकों की अनदेखी या विभागीय उदासीनता सामने आती है तो जिम्मेदारी केवल छात्रावास प्रबंधन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

 

अब जिला प्रशासन के सामने दो स्पष्ट सवाल हैं—अग्निकांड की निष्पक्ष जांच कब पूरी होगी और जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई कब होगी?

फिलहाल आग बुझ चुकी है, लेकिन राजौला छात्रावास की घटना से उठे ये सवाल अभी भी धधक रहे हैं।

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