स्वामित्व योजना में पटवारियों की भूमिका पर उठे सवाल

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स्वामित्व योजना में पटवारियों की भूमिका पर उठे सवाल

 

डीड तैयार करने और पहला पक्ष बनाए जाने के विरोध में पटवारी संघ, विवाद होने पर कानूनी जिम्मेदारी की आशंका

 

भोपाल। मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी भूमि की मुफ्त रजिस्ट्री शुरू होने से पहले ही पटवारियों की आपत्तियां सामने आ गई हैं। नई व्यवस्था में रजिस्ट्री की डीड तैयार करने से लेकर प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका दिए जाने को लेकर पटवारी संघ ने विरोध जताया है।

 

पटवारियों का कहना है कि यदि भविष्य में संबंधित जमीन के मालिकाना हक, खसरे अथवा नक्शे को लेकर कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो रजिस्ट्री में उनकी भूमिका के कारण कानूनी जवाबदेही उन पर आ सकती है। इसी आशंका को लेकर संघ ने सरकार के समक्ष अपनी चिंताएं रखी हैं।

 

पटवारी ही बनाएगा रजिस्ट्री की डीड

 

स्वामित्व योजना के तहत सर्वे और उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर संपदा-2.0 पोर्टल पर रजिस्ट्री की डीड तैयार करने की जिम्मेदारी पटवारी को दी गई है। प्रस्तावित व्यवस्था में सरकार की ओर से पटवारी पहला पक्ष और संपत्ति का मालिकाना हक पाने वाला व्यक्ति दूसरा पक्ष होगा।

 

यही व्यवस्था पटवारियों की चिंता का प्रमुख कारण बनी हुई है। संघ का तर्क है कि उन्हें ऐसी प्रक्रिया में पक्षकार बनाया जा रहा है, जबकि जमीन के स्वामित्व संबंधी विवादों पर अंतिम निर्णय करने के लिए उनके पास पर्याप्त न्यायिक अधिकार नहीं हैं।

 

आपत्तियों पर फैसला करने के अधिकार का भी सवाल

 

पटवारी संघ का कहना है कि उन्हें आपत्तियों पर निर्णय लेने, अधिकार अभिलेख में नाम दर्ज करने तथा धारा 129 और 250 से संबंधित न्यायिक शक्तियां प्राप्त नहीं हैं। ऐसे में भविष्य में किसी विवाद की स्थिति में केवल डीड तैयार करने के आधार पर उन्हें जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।

 

संघ की मांग है कि या तो पटवारी को रजिस्ट्री में पहला पक्ष नहीं बनाया जाए अथवा उनकी जिम्मेदारी, अधिकार और कानूनी जवाबदेही को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाए।

 

कैबिनेट में भी उठा मामला

 

पटवारियों के विरोध का मुद्दा मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में भी सामने आया। बताया गया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रियों से पटवारियों से संवाद कर उनकी आशंकाओं को दूर करने और उन्हें व्यवस्था के संबंध में समझाने को कहा है।

 

अब सरकार के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का सुरक्षित और पंजीकृत दस्तावेज उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी योजना को समयबद्ध तरीके से लागू करना, वहीं दूसरी ओर इस पूरी प्रक्रिया में पटवारियों की कानूनी जिम्मेदारी को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान करना।

सवाल यही है कि रजिस्ट्री की डीड तैयार करने की जिम्मेदारी यदि पटवारी की होगी, तो भविष्य में स्वामित्व विवाद की स्थिति में कानूनी जवाबदेही किसकी होगी? इस बिंदु पर स्पष्टता के बिना पटवारियों का विरोध आगे भी जारी रहने की संभावना है।

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