अंबानी की गणेश पूजा में धीरेंद्र शास्त्री का देसी अंदाज, क्या पहने थे ‘सोने के खड़ाऊँ’?

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अंबानी की गणेश पूजा में धीरेंद्र शास्त्री का देसी अंदाज, क्या पहने थे ‘सोने के खड़ाऊँ’?

खड़ाऊँ की चमक ने खींचा कैमरों का ध्यान, सोशल मीडिया पर शुरू हुई चर्चाओं की नई कहानी

मुंबई। अंबानी परिवार की गणेश पूजा में बॉलीवुड से लेकर उद्योग जगत और आध्यात्मिक क्षेत्र की कई चर्चित हस्तियों का जमावड़ा रहा। चमक-दमक से भरी इस महफिल में जब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री पहुंचे तो उनका अंदाज बाकी मेहमानों से कुछ अलग नजर आया।

भगवा कुर्ता, धोती, कंधे पर शॉल और पैरों में पारंपरिक खड़ाऊँ—धीरेंद्र शास्त्री का यह देसी और संत वाला रूप कैमरों में कैद हो गया। लेकिन इस बार चर्चा सिर्फ उनके पहनावे की नहीं हुई।

नजरें जाकर टिक गईं पैरों पर… और यहीं से शुरू हुई एक नई चर्चा।

आखिर खड़ाऊँ में ऐसा क्या था?

तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही लोगों ने धीरेंद्र शास्त्री की खड़ाऊँ को लेकर तरह-तरह के कयास लगाने शुरू कर दिए। किसी को यह साधारण पारंपरिक खड़ाऊँ लगी, तो किसी को इसकी चमक कुछ अलग दिखाई दी।

बस फिर क्या था—सोशल मीडिया पर सवाल तैरने लगा,

“क्या धीरेंद्र शास्त्री ने सोने की खड़ाऊँ पहन रखी थी?”

अब सवाल जितना छोटा है, चर्चा उतनी ही बड़ी हो गई।

हालांकि, तस्वीर या वीडियो में किसी वस्तु की चमक देखकर उसे सोना मान लेना कितना सही है, यह अलग विषय है। उपलब्ध जानकारी में इन खड़ाऊँ को पारंपरिक खड़ाऊँ ही बताया गया है और इनके वास्तव में सोने से बने होने की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

चमक ने पैदा कर दिया सस्पेंस

अंबानी परिवार के आयोजन में वैसे भी चमक-दमक कोई नई बात नहीं है। महंगे परिधान, आभूषण, डिजाइनर कपड़े और कैमरों की फ्लैश लाइट के बीच हर चीज कुछ ज्यादा ही चमकती नजर आती है।

लेकिन यहां दिलचस्प बात यह रही कि चर्चा किसी महंगे हार, घड़ी या कपड़े की नहीं, बल्कि खड़ाऊँ की शुरू हो गई।

सोशल मीडिया का अपना गणित है—तस्वीर आई, नजर पैरों पर गई और देखते ही देखते सवाल बन गया।

खड़ाऊँ साधारण थी या खास?
चमक डिजाइन की थी या धातु की?
और अगर सोने की नहीं थी तो इतनी चर्चा क्यों?

इन सवालों का फिलहाल कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं है।

संत का पहनावा रहा आकर्षण का केंद्र

धीरेंद्र शास्त्री का पहनावा पूरी तरह पारंपरिक भारतीय अंदाज में था। भगवा वस्त्र और खड़ाऊँ ने उनके व्यक्तित्व को एक अलग पहचान दी। जहां समारोह में कई मेहमान आधुनिक और भव्य परिधानों में दिखाई दिए, वहीं धीरेंद्र शास्त्री अपने पारंपरिक रूप में नजर आए।

शायद यही सादगी कैमरों के लिए भी खास बन गई।

और फिर खड़ाऊँ की चमक ने सोशल मीडिया को चर्चा का एक और विषय दे दिया।

सोने की खड़ाऊँ या सिर्फ सोशल मीडिया का सस्पेंस?

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि ‘सोने की खड़ाऊँ’ का दावा प्रमाणित तथ्य नहीं है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चा जरूर है, लेकिन बिना पुष्टि के इसे सच मानना उचित नहीं होगा।

हो सकता है खड़ाऊँ की डिजाइन, पॉलिश या रोशनी के कारण वह सुनहरी दिखाई दी हो। यह भी संभव है कि उसमें किसी अन्य धातु या सजावटी तत्व का इस्तेमाल हुआ हो।

यानी तस्वीर सामने है, खड़ाऊँ सामने है, चमक भी सामने है…

लेकिन सोना? उसका राज अभी बाकी है।

अंबानी की गणेश पूजा में धीरेंद्र शास्त्री का यह देसी अंदाज फिलहाल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। और इस पूरी कहानी में सबसे दिलचस्प सवाल यही है—

“आखिर पैरों में वह खड़ाऊँ थी कैसी, जिसकी चमक ने सोने की चर्चा शुरू कर दी?”

नोट: खड़ाऊँ के वास्तविक रूप से सोने की बनी होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए ‘सोने की खड़ाऊँ’ को सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा/दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

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