फर्जी सैलरी स्लिप और जाली एक्सपीरियंस से CEO की कुर्सी तक पहुंचा शख्स, ₹2.80 लाख महीने का पैकेज लेने का आरोप
बैकग्राउंड वेरिफिकेशन में खुला फर्जीवाड़ा, कानपुर से देवेंद्र दुबे गिरफ्तार; ग्वालियर क्राइम ब्रांच की कार्रवाई
ग्वालियर/कानपुर। फर्जी सैलरी स्टेटमेंट और कथित जाली अनुभव प्रमाण-पत्र के सहारे प्रतिष्ठित ऑटोमोबाइल कंपनी में ऊंचे पद पर नौकरी हासिल करने के मामले में ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मामले के आरोपी 43 वर्षीय देवेंद्र कुमार दुबे, निवासी कानपुर, को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने एक प्रतिष्ठित ऑटोमोबाइल कंपनी में नौकरी हासिल करने के लिए कथित तौर पर लैंडमार्क ग्रुप का फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र और ₹2,80,670 प्रतिमाह वेतन दर्शाने वाला सैलरी स्टेटमेंट प्रस्तुत किया था। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उसे कंपनी में पहले ग्रुप वाइस प्रेसिडेंट के पद पर नियुक्त किया गया। बाद में उसे ग्रुप सीईओ (आफ्टर सेल्स) की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई।
अगस्त 2025 में हुई थी नियुक्ति
जांच के मुताबिक कानपुर निवासी देवेंद्र कुमार दुबे की अगस्त 2025 में अनंत टोयोटा (श्रीतुलजा भवानी ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड) में ग्रुप वाइस प्रेसिडेंट के पद पर नियुक्ति हुई थी। कंपनी में काम के दौरान उसकी जिम्मेदारियां बढ़ाई गईं और उसे ग्रुप सीईओ (आफ्टर सेल्स) का प्रभार भी दिया गया।
पुलिस का आरोप है कि नौकरी पाने के दौरान देवेंद्र ने अपने पूर्व रोजगार और वेतन से संबंधित ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत किए, जो बाद की जांच में कथित तौर पर फर्जी पाए गए।
₹2.80 लाख प्रतिमाह की सैलरी का दस्तावेज
मामले में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज कथित तौर पर वह सैलरी स्टेटमेंट है, जिसमें देवेंद्र का मासिक वेतन ₹2,80,670 दर्शाया गया था। पुलिस के अनुसार दस्तावेज पर आरोपी के हस्ताक्षर भी पाए गए हैं।
करीब नौ महीने तक कंपनी में काम करने के बाद आरोपी ने मई 2026 में अचानक इस्तीफा दे दिया।
Full and Final Settlement के दौरान खुला राज
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब कंपनी प्रबंधन इस्तीफे के बाद आरोपी का फुल एंड फाइनल सेटलमेंट तैयार कर रहा था। इसी प्रक्रिया के दौरान उसके पूर्व रोजगार से जुड़े दस्तावेजों का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन कराया गया।
कंपनी ने जब कथित तौर पर लैंडमार्क ग्रुप से उसके रोजगार की जानकारी मांगी तो वहां से सामने आया कि देवेंद्र कुमार दुबे नाम के व्यक्ति के वहां काम करने का रिकॉर्ड ही नहीं था।
इसके बाद कंपनी प्रबंधन को दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर संदेह हुआ और मामले की शिकायत पुलिस से की गई।
HR मैनेजर की शिकायत पर मामला दर्ज
पुलिस के मुताबिक कंपनी के एचआर मैनेजर की शिकायत के आधार पर अगस्त 2026 में ग्वालियर क्राइम ब्रांच थाने में आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने सहित संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया।
एफआईआर दर्ज होने के बाद से आरोपी फरार चल रहा था।
कानपुर में दबिश देकर गिरफ्तारी
ग्वालियर क्राइम ब्रांच थाना प्रभारी अमित शर्मा के अनुसार पुलिस को आरोपी के कानपुर में छिपे होने की सूचना मिली थी। इसके बाद क्राइम ब्रांच की विशेष टीम ने कानपुर स्थित उसके ठिकाने पर दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस आरोपी को ट्रांजिट रिमांड के जरिए ग्वालियर लेकर आई है।
अब पुलिस खंगाल रही फर्जीवाड़े का पूरा नेटवर्क
गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि कथित फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र और सैलरी दस्तावेज कहां तैयार किए गए, किसने तैयार किए और क्या आरोपी ने इससे पहले भी किसी दूसरी कंपनी में इसी तरीके से नौकरी हासिल की थी।
पुलिस अब आरोपी के पुराने रोजगार, प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों और अन्य कंपनियों में उसके द्वारा दी गई जानकारी की भी जांच कर सकती है।
फर्जी दस्तावेजों के सहारे लाखों रुपये का वेतन पैकेज और बड़े पद तक पहुंचने का यह मामला कॉरपोरेट सेक्टर में बैकग्राउंड वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों और दस्तावेजों की अंतिम पुष्टि जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।










