नगरीय निकायों में GeM खरीदी पर 250 करोड़ के सवाल!
समीक्षा बैठक में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं ने मचाई खलबली, अब जांच और जिम्मेदारी तय करने की चुनौती
भोपाल। मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले GeM पोर्टल पर हुई खरीद को लेकर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि विभिन्न नगरीय निकायों में हुई खरीदी में करीब 250 करोड़ रुपये की अनियमितता का मामला समीक्षा के दौरान सामने आया है।
मामला सामने आने के बाद नगरीय प्रशासन विभाग में हड़कंप की स्थिति है। जानकारी के अनुसार इस संबंध में अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे और मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम के एमडी संकेत भोंडवे की मौजूदगी में उच्चस्तरीय समीक्षा की गई।
सवाल सिर्फ खरीदी का नहीं, प्रक्रिया का है
GeM पोर्टल का उद्देश्य सरकारी खरीदी में पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। ऐसे में यदि करोड़ों रुपये की खरीद में नियमों की अनदेखी, प्रक्रिया में गड़बड़ी या अन्य वित्तीय अनियमितताएं सामने आती हैं तो यह सीधे तौर पर सरकारी खरीद व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े करती हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
250 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता आखिर हुई कैसे?
– किन नगरीय निकायों में गड़बड़ी सामने आई?
– किन वस्तुओं और सेवाओं की खरीदी में अनियमितता मिली?
– क्या बाजार मूल्य से अधिक दरों पर भुगतान हुआ?
– क्या एक ही फर्म अथवा चुनिंदा विक्रेताओं को बार-बार काम मिला?
– क्या टेंडर/GeM प्रक्रिया के नियमों का पालन हुआ?
– भुगतान से पहले अधिकारियों ने किन दस्तावेजों और दरों का सत्यापन किया?
– और सबसे अहम—इस पूरे मामले में जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
क्या अब निकलेगी जिम्मेदारी की फाइल?
नगरीय निकायों में होने वाली हर सरकारी खरीदी अंततः जनता के पैसे से होती है। इसलिए यदि समीक्षा में 250 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं तो केवल समीक्षा बैठक कर मामला समाप्त करने के बजाय खरीदवार, निकायवार और अधिकारीवार जांच की जरूरत है।
जनता को यह जानने का अधिकार है कि उसके पैसे से क्या खरीदा गया, किस दर पर खरीदा गया और भुगतान किसके अनुमोदन से हुआ।
अब देखना यह है कि सरकार इस मामले में केवल आंकड़ों की समीक्षा करती है या फिर दोषियों की जवाबदेही भी तय करती है।










