पर्व सामने, सड़कें बेहाल: पीडब्ल्यूडी की तैयारी पर बड़ा सवाल
गड्ढों में शहर की सड़कें, धूल-कीचड़ से राहगीर परेशान—तीन-चार दिन में सुधार का दावा, लेकिन सवाल है काम कब और कितना टिकेगा?
जबलपुर, रविवार, 13 सितम्बर 2026।
गणेशोत्सव की शुरुआत होने वाली है। इसके बाद पितृपक्ष, नवरात्र और दशहरा जैसे बड़े पर्व सामने हैं। शहर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ेगी, पंडालों तक प्रतिमाएं पहुंचेंगी, चल समारोह निकलेंगे और विसर्जन जुलूसों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरेंगे। लेकिन शहर की सड़कों की हालत देखकर सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या पीडब्ल्यूडी और नगर निगम को पर्वों से पहले सड़कों की यह बदहाली दिखाई नहीं दे रही?
शहर के अनेक प्रमुख मार्गों पर गड्ढे, उखड़ी सड़कें, धूल, कीचड़ और अधूरे रीस्टोरेशन के काम राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। हालात ऐसे हैं कि कई जगह दोपहिया वाहन चालकों को गड्ढों से बचकर निकलना पड़ रहा है। ऐसे में जब पर्वों के दौरान सड़कों पर भीड़ कई गुना बढ़ेगी, तब यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुरक्षा का क्या होगा?
पीडब्ल्यूडी से सीधा सवाल—सड़कें पर्व देखकर क्यों सुधरती हैं?
सबसे बड़ा सवाल पीडब्ल्यूडी से है कि यदि सड़कों की मरम्मत और गड्ढों की भरपाई जरूरी थी तो बारिश के दौरान लगातार बिगड़ती स्थिति के बावजूद समय रहते स्थायी और प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
हर साल मानसून के बाद सड़कों की यही तस्वीर सामने आती है। गड्ढे भरने के लिए डस्ट, मुरम और अन्य ट्रीटमेंट किए जाते हैं, लेकिन बारिश या भारी यातायात के बाद स्थिति फिर जस की तस हो जाती है।
अब कहा जा रहा है कि तीन से चार दिन में रीस्टोरेशन का काम पूरा कर लिया जाएगा। सवाल यह है कि क्या इतने बड़े शहर की सड़कों के लिए तीन-चार दिन की अस्थायी मरम्मत ही पर्याप्त है? और यदि है, तो इसकी गुणवत्ता की जिम्मेदारी कौन लेगा?
प्रतिमाएं निकलेंगी या गड्ढों में अटकेंगे रास्ते?
गणेश प्रतिमाओं की स्थापना से लेकर विसर्जन तक सड़कों पर वाहनों और श्रद्धालुओं का दबाव बढ़ेगा। बड़ी प्रतिमाओं को लेकर वाहन इन्हीं मार्गों से गुजरेंगे।
ऐसे में यदि किसी प्रमुख मार्ग पर गड्ढे के कारण प्रतिमा ले जा रहा वाहन असंतुलित हुआ या यातायात बाधित हुआ तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
क्या पीडब्ल्यूडी और नगर निगम ने गणेश पंडालों, चल समारोह और विसर्जन मार्गों का संयुक्त रोड ऑडिट कराया है?
मालवीय चौक से हनुमानताल तक—कौन देखेगा इन सड़कों को?
मालवीय चौक, हनुमानताल, अधारताल, गढ़ा, रामपुर, ग्वारीघाट, कांचघर और रांझी सहित शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव पहले से ही अधिक है। पर्वों में इन मार्गों पर भीड़ और बढ़ेगी।
ऐसे में केवल गड्ढों में मुरम या डस्ट डाल देना समाधान नहीं हो सकता। सवाल गुणवत्ता, टिकाऊपन और जवाबदेही का है।
सिर्फ दावा नहीं, मौके पर दिखे काम
पीडब्ल्यूडी के जिम्मेदार अधिकारी कह रहे हैं कि तीन-चार दिन में सभी रीस्टोरेशन कार्य गुणवत्ता के साथ पूरे कर दिए जाएंगे। अब जनता भी यही देखना चाहती है कि यह दावा जमीन पर कितना उतरता है।
कौन-सी सड़क कब सुधरेगी, किस एजेंसी ने काम किया, कितने क्षेत्र में रीस्टोरेशन हुआ और काम की गुणवत्ता की जांच कौन करेगा—इसकी सार्वजनिक जानकारी सामने आनी चाहिए।
पर्व के दौरान यदि सड़कें फिर उखड़ गईं तो यह सवाल भी उठेगा कि आखिर जनता के पैसे से किए गए रीस्टोरेशन का फायदा कितने दिन मिला?
आयुक्त महोदय से भी अपेक्षा—पीडब्ल्यूडी के दावों की करें मॉनिटरिंग
नगर निगम आयुक्त प्रेम प्रकाश अहिरवार से अपेक्षा है कि पर्वों को देखते हुए केवल अधिकारियों की रिपोर्ट पर निर्भर न रहें, बल्कि प्रमुख मार्गों का स्वयं या वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से स्थल निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण कराएं।
क्योंकि पर्वों में सड़क केवल आवागमन का माध्यम नहीं होती—यही सड़कें श्रद्धालुओं, प्रतिमाओं, चल समारोह, पुलिस, एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं का रास्ता होती हैं।
अब जनता को मीटिंग में लिए गए निर्णय नहीं, जमीन पर दुरुस्त सड़कें चाहिए।
पीडब्ल्यूडी और नगर निगम के सामने सीधा सवाल है—पर्व आने से पहले सड़कें सुधरेंगी या फिर हर साल की तरह गड्ढों पर सिर्फ मरम्मत का दावा ही चलता रहेगा?










