अल्ट्रा क्लीन कंपनी के संचालक मुकेश कालवे और मैनेजर विकास रजक पर उठ रहे सवाल, प्रियंक कानूनगो की मौजूदगी में भी सामने आई थी मजदूरों की पीड़ा
जबलपुर। नगर निगम जबलपुर की आउटसोर्स एजेंसी अल्ट्रा क्लीन कंपनी एक बार फिर विवादों के घेरे में है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त अनुबंध में स्पष्ट उल्लेख है कि सफाईकर्मियों को 431 रुपये प्रतिदिन परिश्रमिक दिया जाना है। इस हिसाब से एक कर्मचारी का मासिक भुगतान लगभग 12 हजार रुपये बनता है।
इसके बावजूद सफाईकर्मियों का आरोप है कि उन्हें प्रतिमाह केवल 6,500 से 8,000 रुपये तक ही भुगतान किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि अनुबंध के अनुसार मिलने वाली पूरी राशि कर्मचारियों तक क्यों नहीं पहुंच रही और शेष राशि का हिसाब क्या है?
सफाईकर्मियों का आरोप है कि अल्ट्रा क्लीन कंपनी के संचालक मुकेश कालवे और मैनेजर विकास रजक के प्रबंधन में संचालित व्यवस्था में लंबे समय से वेतन भुगतान को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें न तो कटौती का स्पष्ट विवरण दिया जाता है और न ही भुगतान का पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाता है।
कुछ समय पहले मानवाधिकार संगठन के सदस्य प्रियंक कानूनगो जब सफाईकर्मियों के बीच पहुंचे थे तब भी कई कर्मचारियों ने उनके समक्ष कम वेतन मिलने की बात कही थी। उस दौरान के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें सफाईकर्मी कैमरे के सामने यह कहते दिखाई दिए कि उन्हें प्रतिमाह केवल 7 से 8 हजार रुपये ही मिलते हैं, जबकि अनुबंध में 431 रुपये प्रतिदिन का भुगतान निर्धारित है।
अब कर्मचारियों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि नगर निगम प्रशासन अल्ट्रा क्लीन कंपनी के भुगतान, उपस्थिति रजिस्टर, ईपीएफ, ईएसआई और अनुबंध की शर्तों की स्वतंत्र जांच कराए। यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या श्रमिकों के अधिकारों का हनन सामने आता है तो कंपनी प्रबंधन, संचालक मुकेश कालवे, मैनेजर विकास रजक तथा संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।










