क्या हम केवल 9 अगस्त के आदिवासी हैं

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युवा पीढ़ी के नाम जयस प्रभारी अखिलेश इरपाचे का संदेश: “उत्सव नहीं, पूरे वर्ष सामाजिक जागरण की जरूरत”

 

जबलपुर। जयस प्रभारी अखिलेश इरपाचे ने आदिवासी समाज की युवा पीढ़ी के नाम एक भावनात्मक और चिंतनशील संदेश जारी करते हुए सवाल उठाया कि क्या हमारा समाज केवल 9 अगस्त (विश्व आदिवासी दिवस) तक ही सीमित होकर रह गया है?

 

उन्होंने कहा कि आज समाचार पत्रों और सोशल मीडिया में समाज के कुछ युवाओं के नाम चोरी, लूट, मारपीट, नशाखोरी और सड़क दुर्घटनाओं जैसी घटनाओं में दिखाई देते हैं। यह केवल अपराध की खबर नहीं, बल्कि समाज के भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

 

अखिलेश इरपाचे ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के अनेक युवा अपनी मूल संस्कृति, बोली, भाषा, रीति-रिवाज और पारंपरिक पहचान से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने सभी से अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने, उसका सम्मान करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का आह्वान किया।

 

उन्होंने कहा कि हर वर्ष 9 अगस्त को हजारों लोग रैली निकालते हैं, मंच सजते हैं, भाषण होते हैं और शुभकामनाओं का आदान-प्रदान होता है, लेकिन अगले ही दिन सामाजिक जागरूकता का अभियान ठंडा पड़ जाता है। यदि पूरे वर्ष शिक्षा, नशा मुक्ति, रोजगार, संस्कृति संरक्षण, युवाओं के मार्गदर्शन और बेटियों की सुरक्षा पर गंभीरता से काम नहीं किया जाएगा, तो केवल एक दिन का आयोजन समाज का भविष्य नहीं बदल सकता।

 

चिंता के प्रमुख विषय

 

– युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति।

– चोरी, लूट और हिंसक घटनाओं में बढ़ती संलिप्तता।

– सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ती मौतें।

– शिक्षा और रोजगार के अवसरों का अभाव।

– मूल भाषा, संस्कृति और परंपराओं से दूरी।

– सामाजिक विघटन और आपसी विभाजन।

– बेटियों की सुरक्षा एवं सम्मान का प्रश्न।

– सामाजिक जागरूकता की कमी।

 

समाज के लिए सात संकल्प

 

– प्रत्येक गांव में नशा मुक्ति अभियान चलाया जाए।

– बच्चों और युवाओं को शिक्षा एवं संस्कार से जोड़ा जाए।

– अपनी भाषा, बोली, संस्कृति और परंपराओं पर गर्व किया जाए।

– बेटियों की सुरक्षा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

– सामाजिक एकता और संगठन को मजबूत बनाया जाए।

– समाज के सामने मौजूद चुनौतियों के कारणों को समझकर सकारात्मक समाधान खोजे जाएँ।

– सभी सामाजिक संगठन आपसी मतभेद भुलाकर समाजहित में मिलकर कार्य करें।

 

अखिलेश इरपाचे ने सभी सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, युवाओं और समाजसेवियों से संगठनात्मक राजनीति से ऊपर उठकर समाज के व्यापक हित में कार्य करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि कोई संगठन छोटा या बड़ा नहीं होता, बड़ा वही है जो समाज के लिए ईमानदारी और समर्पण से काम करता है।

 

उन्होंने समाज के सामने पाँच प्रमुख लक्ष्य रखे—नशा मुक्त युवा, संस्कारित परिवार, शिक्षित समाज, सुरक्षित बेटियाँ और सशक्त संस्कृति।

 

अपने संदेश के अंत में उन्होंने कहा कि यदि आज समाज नहीं जागा तो आने वाली पीढ़ियाँ पूछेंगी कि जब समाज भटक रहा था तब हम क्या कर रहे थे। यह समय केवल भाषणों का नहीं, बल्कि निरंतर कार्य, समर्पण और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का है।

 

संकल्प: “हम केवल 9 अगस्त को नहीं, बल्कि वर्ष के प्रत्येक दिन समाज, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कार्य करेंगे। यही हमारी पहचान, हमारी शक्ति और हमारी जिम्मेदारी है।”

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