न्याय के मंदिर में रिश्वत! सीधी जिला न्यायालय के डीपीओ पर लोकायुक्त का शिकंजा

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₹10 हजार की घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, न्यायालय परिसर में मचा हड़कंप

एक ही प्रकरण में पहले एसआई और अब डीपीओ गिरफ्तार, क्या भ्रष्टाचार की जड़ें व्यवस्था तक फैली हैं?

सीधी। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध रीवा लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सीधी जिला न्यायालय के जिला अभियोजन अधिकारी (DPO) राजकुमार रावत को ₹10 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई न्यायालय परिसर के सामने हुई, जिससे पूरे परिसर में हड़कंप मच गया और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

जानकारी के अनुसार फरियादी पंकज तिवारी ने लोकायुक्त से शिकायत की थी कि उनके प्रकरण में कार्रवाई के बदले जिला अभियोजन अधिकारी द्वारा ₹10 हजार की रिश्वत मांगी जा रही है। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने मामले का सत्यापन कराया। आरोप सही पाए जाने पर योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप बिछाया गया।

जैसे ही आरोपी अधिकारी ने न्यायालय परिसर के सामने फरियादी से रिश्वत की रकम ली, पहले से घात लगाए बैठी रीवा लोकायुक्त टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और न्यायालय परिसर में मौजूद लोगों की भीड़ जुट गई।

इस मामले का एक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि इसी प्रकरण से जुड़े मामले में वर्ष 2025 में मझौली थाना के तत्कालीन एसआई कमलेश त्रिपाठी भी लोकायुक्त ट्रैप में गिरफ्तार हो चुके हैं। अब उसी प्रकरण में जिला अभियोजन अधिकारी की गिरफ्तारी ने भ्रष्टाचार की परतों को और गहरा कर दिया है।

लोकायुक्त पुलिस आरोपी अधिकारी को आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए उच्च विश्राम गृह ले गई, जहां भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आवश्यक कार्रवाई जारी है।

तीखे सवाल

  • जब अभियोजन अधिकारी ही रिश्वत लेने के आरोप में पकड़े जाएं तो न्याय की निष्पक्षता पर जनता कैसे विश्वास करे?
  • क्या एक ही प्रकरण में लगातार हो रही गिरफ्तारियां किसी बड़े भ्रष्टाचार तंत्र की ओर संकेत नहीं करतीं?
  • क्या इस मामले में अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होगी?
  • क्या ऐसी कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक सीमित रहेगी या पूरे नेटवर्क का भी पर्दाफाश होगा?

रीवा लोकायुक्त की यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा संदेश है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि जांच कितनी गहराई तक पहुंचती है और दोषियों पर कितनी कठोर कार्रवाई होती है।

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