आयुक्त की सख्ती के बाद भी नहीं थम रही कथित अवैध वसूली! काउंटर चेक में ₹5 की जगह ₹10 वसूले, ₹2000 का स्पॉट फाइन, आयुक्त महोदय, अब निर्णायक कार्रवाई कीजिए— चेतावनी के बाद भी नहीं रुकी कथित मनमानी, अनुबंध निरस्तीकरण का नोटिस जारी हो।आखिर काशीनाथ झा , और सुलभ जबलपुर के जिम्मेदार चाहते क्या हैं

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स्वास्थ्य अधिकारी अभिनव मिश्रा और एसआई अनंत दुबे की सक्रियता में हुई कार्रवाई, फिर भी उठ रहे जवाबदेही के सवाल

जबलपुर। नगर निगम आयुक्त श्री रामप्रकाश अहिरवार द्वारा सुलभ इंटरनेशनल के वाइस चेयरमैन एवं जबलपुर संभाग प्रमुख काशीनाथ झा को स्पष्ट चेतावनी दिए जाने के बाद भी शहर में कथित अनियमितताओं पर पूर्ण विराम नहीं लग सका। सुलभ के काउंटर चेक के दौरान एक बार फिर निर्धारित शुल्क के स्थान पर अधिक राशि वसूले जाने का मामला सामने आया, जिसके बाद मौके पर ही चालानी कार्रवाई करते हुए ₹2000 का स्पॉट फाइन लगाया गया।

नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी अभिनव मिश्रा एवं जोन क्रमांक-15 के एसआई अनंत दुबे की सक्रियता में किए गए  निरीक्षण के दौरान फोटो और वीडियो साक्ष्य भी तैयार किए गए।

जांच के दौरान कथित रूप से पाया गया कि जहां निर्धारित शुल्क ₹5 होना चाहिए था, वहां ₹10 की राशि वसूली जा रही थी। मौके पर ही संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के तहत ₹2000 का स्पॉट फाइन लगाया गया तथा नोटिस जारी किया गया।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब स्वयं नगर निगम आयुक्त लगातार बैठकें लेकर व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दे रहे हैं और सुलभ इंटरनेशनल के वाइस चेयरमैन काशीनाथ झा भी शहर में मौजूद रहकर व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे हैं, तब भी यदि काउंटर चेक में निर्धारित दर सूची का पालन नहीं हो रहा, तो आखिर जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

जनता के बीच अब यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी और आयुक्त की सख्त चेतावनी के बावजूद कथित अधिक शुल्क वसूली जारी है, तो क्या स्थानीय स्तर पर निर्देशों का पालन नहीं कराया जा रहा है, या फिर निगरानी व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर कमी बनी हुई है?

उल्लेखनीय है कि उजला दर्पण समाचार पत्र पिछले लगभग एक वर्ष से सुलभ शौचालयों में कथित अधिक शुल्क वसूली, दर सूची का पालन न होने तथा जनसुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों को लगातार जनहित में उठाता रहा है। लगातार प्रकाशित समाचारों के बाद नगर निगम प्रशासन ने कार्रवाई प्रारंभ की है, किंतु अब यह अपेक्षा की जा रही है कि केवल चालानी कार्रवाई तक ही मामला सीमित न रहे, बल्कि यदि अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन सिद्ध होता है तो जिम्मेदारों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नगर निगम आयुक्त के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी यदि व्यवस्थाएं नहीं सुधरतीं, तो आखिर इसके लिए जवाबदेह कौन है? जनता को भी यही अपेक्षा है कि अनुबंध की प्रत्येक शर्त का पालन हो, निर्धारित दर सूची के अनुसार ही शुल्क लिया जाए और सार्वजनिक सुविधाओं के संचालन में किसी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे।

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