प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच आस्था, मां नर्मदा से जुड़ाव और प्रकृति की खूबसूरती को कैमरे में कैद करने का अलग अंदाज


जबलपुर।
किसी शहर की व्यवस्था केवल फाइलों और बैठकों से नहीं चलती। उसके लिए जरूरी होता है जमीन पर उतरना, हालात को करीब से देखना और जरूरत के समय स्वयं मौजूद रहना। जबलपुर नगर निगम आयुक्त श्री रामप्रकाश अहिरवार की कार्यशैली में यही सक्रियता दिखाई देती है। दिन हो या रात, कार्यालय का काम हो या शहर के किसी हिस्से की व्यवस्था—उनकी सक्रियता लगातार बनी रहती है। जिम्मेदारियों की व्यस्तता के बीच भी चेहरे पर शिकन नहीं और काम में विराम नहीं।
जिम्मेदारियों के बीच लगातार सक्रियता
नगर निगम का दायरा जितना व्यापक है, उससे जुड़ी जिम्मेदारियां भी उतनी ही बड़ी हैं। शहर की स्वच्छता से लेकर निर्माण कार्यों तक, यातायात व्यवस्था से लेकर नालियों और जल निकासी तक, बाजारों से लेकर नागरिक सुविधाओं तक अनेक विषयों पर लगातार निगरानी की आवश्यकता रहती है।
आयुक्त श्री रामप्रकाश अहिरवार विभिन्न विभागों के कार्यों को लेकर सक्रिय रहते हैं। शहर में चल रहे कार्यों की जानकारी लेना, व्यवस्थाओं का निरीक्षण करना और आवश्यक दिशा-निर्देश देना उनकी कार्यशैली का हिस्सा है। यही वजह है कि प्रशासनिक व्यस्तताओं के बावजूद वे केवल कार्यालय तक सीमित रहने के बजाय शहर के अलग-अलग हिस्सों में व्यवस्थाओं को करीब से देखने पर जोर देते दिखाई देते हैं।
दिन की शुरुआत से रात तक जिम्मेदारी का सिलसिला
प्रशासनिक पद की जिम्मेदारी में समय की कोई निश्चित सीमा नहीं होती। कभी बैठक, कभी निरीक्षण, कभी विभागीय समीक्षा तो कभी किसी आयोजन की व्यवस्था—कार्यक्रम लगातार चलते रहते हैं।
ऐसी व्यस्तता के बीच भी आयुक्त का सहज रहना ध्यान आकर्षित करता है। काम कितना भी हो, परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण हों, चेहरे पर तनाव या शिकन के बजाय संयम और सक्रियता दिखाई देती है।
यही कार्यशैली उन्हें केवल पद पर बैठे अधिकारी के बजाय लगातार मैदान में सक्रिय रहने वाले प्रशासक की छवि देती है।
आस्था के बीच भी व्यवस्था पर नजर
आयुक्त श्री रामप्रकाश अहिरवार के व्यक्तित्व का एक पक्ष प्रशासनिक सक्रियता से अलग भी दिखाई देता है। धार्मिक आयोजनों और अनुष्ठानों में उनकी सहभागिता उनके आस्था से जुड़े पक्ष को सामने लाती है।
धार्मिक आयोजन में पहुंचने के दौरान भी उनकी नजर व्यवस्थाओं पर बनी रहती है। आयोजन की व्यवस्था कैसी है, लोगों की सुविधा कैसी है और आसपास की स्वच्छता की स्थिति क्या है—इन पहलुओं को देखना उनके प्रशासनिक स्वभाव का हिस्सा नजर आता है।
यहां उनका व्यक्तित्व एक अलग रूप में सामने आता है—जहां आस्था के साथ जिम्मेदारी भी साथ चलती है।
मां नर्मदा से विशेष जुड़ाव
जबलपुर की पहचान मां नर्मदा के बिना अधूरी है। नर्मदा के घाट शहर की संस्कृति, आस्था और सामाजिक जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।
आयुक्त श्री रामप्रकाश अहिरवार का घाटों पर पहुंचना और वहां की व्यवस्थाओं तथा स्वच्छता की स्थिति को देखना इसी जुड़ाव को दर्शाता है। मां नर्मदा के दर्शन के साथ घाटों की स्वच्छता और व्यवस्था पर नजर रखना एक ऐसा दृश्य बनाता है, जिसमें व्यक्तिगत आस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी का सुंदर मेल दिखाई देता है।
घाटों की स्वच्छता केवल सफाई का विषय नहीं, बल्कि जबलपुर की पहचान और श्रद्धालुओं की सुविधा से भी जुड़ा विषय है। इसलिए वहां की व्यवस्थाओं पर ध्यान देना नगर प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है।
अधिकारी के भीतर छिपा प्रकृति प्रेमी
लेकिन आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के व्यक्तित्व का सबसे दिलचस्प और अलग पक्ष है—प्रकृति और फोटोग्राफी के प्रति उनका लगाव।
प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच जब उन्हें कुछ पल मिलते हैं, तो उनका कैमरा प्रकृति के उन रंगों को तलाशता दिखाई देता है, जिन्हें सामान्य नजर अक्सर नजरअंदाज कर देती है।
कभी पेड़ों के बीच छनकर आती रोशनी, कभी आसमान के बदलते रंग, कभी पानी की लहरों में बनती आकृतियां तो कभी प्रकृति का कोई छोटा-सा दृश्य—उनकी नजर इन क्षणों को पहचान लेती है।
उनकी फोटोग्राफी में प्रकृति केवल एक दृश्य नहीं रहती, बल्कि वह एक अनुभूति बन जाती है।
कैमरे की नजर में जीवंत होती प्रकृति
फोटोग्राफी किसी दृश्य को कैमरे में कैद करने भर का नाम नहीं। इसके लिए उस दृश्य को महसूस करने वाली नजर चाहिए। प्रकृति के प्रति यही संवेदनशील दृष्टि आयुक्त के फोटोग्राफी प्रेम में दिखाई देती है।
एक पत्ती, एक फूल, आकाश में बदलते बादल, पानी पर पड़ती रोशनी या किसी शांत स्थान का सौंदर्य—जब कैमरे की नजर इन्हें पकड़ती है तो सामान्य दृश्य भी खास बन जाता है।
ऐसा लगता है मानो कैमरा सिर्फ तस्वीर नहीं ले रहा, बल्कि उस पल की जीवंतता को अपने भीतर संजो रहा है।
प्रशासन की कठोरता और प्रकृति की कोमलता का संगम
एक तरफ नगर निगम जैसी बड़ी प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी और दूसरी तरफ प्रकृति के बेहद सूक्ष्म सौंदर्य को महसूस करने वाली नजर—यह विरोधाभास ही आयुक्त के व्यक्तित्व को खास बनाता है।
जहां प्रशासन में निर्णय लेने के लिए दृढ़ता चाहिए, वहीं प्रकृति को समझने के लिए संवेदनशीलता। इन दोनों पहलुओं का एक साथ दिखाई देना उनके व्यक्तित्व को एक अलग आयाम देता है।
दिन में शहर की समस्याओं को देखने वाली नजर और खाली पलों में प्रकृति की सुंदरता तलाशने वाली नजर—दोनों एक ही व्यक्तित्व के दो अलग रंग हैं।
शहर के लिए सक्रियता, जीवन में संवेदनशीलता
किसी अधिकारी की पहचान केवल उसके आदेशों से नहीं, बल्कि उसकी कार्यशैली और लोगों के बीच उसकी मौजूदगी से भी बनती है। आयुक्त श्री रामप्रकाश अहिरवार की कार्यशैली में लगातार सक्रिय रहने की प्रवृत्ति दिखाई देती है।
शहर के किसी हिस्से में स्वच्छता की बात हो, किसी आयोजन की व्यवस्था हो, किसी विभागीय कार्य की समीक्षा हो या नर्मदा घाटों की स्थिति—वे इन विषयों को लेकर सक्रिय नजर आते हैं।
इसी के साथ आस्था और प्रकृति से उनका जुड़ाव उनके व्यक्तित्व में एक मानवीय और संवेदनशील पक्ष भी जोड़ता है।
एक अधिकारी, व्यक्तित्व के कई रंग
आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के व्यक्तित्व को अगर कुछ शब्दों में समेटा जाए तो तस्वीर कुछ ऐसी बनती है—काम के प्रति समर्पण, जिम्मेदारियों के प्रति सजगता, आस्था के प्रति सम्मान और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता।
प्रशासनिक जिम्मेदारियों का दबाव हो या लगातार चलने वाली बैठकों और निरीक्षणों की व्यस्तता, चेहरे पर सहजता बनी रहती है। यही सहजता उनकी कार्यशैली को अलग पहचान देती है।
जबलपुर जैसे बड़े शहर की व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी के बीच प्रकृति के छोटे-छोटे पलों को कैमरे में कैद करना बताता है कि व्यस्त जीवन में भी संवेदनशीलता के लिए जगह बनाई जा सकती है।
चेहरे पर शिकन नहीं, काम में विराम नहीं… और कैमरे की नजर में प्रकृति का हर रंग।
यही आयुक्त श्री रामप्रकाश अहिरवार के व्यक्तित्व की वह तस्वीर है, जिसमें प्रशासनिक सक्रियता के साथ आस्था, संवेदनशीलता और प्रकृति प्रेम के कई रंग एक साथ दिखाई देते हैं।
कमिश्नर हो तो ऐसा—जिम्मेदारियों के बीच भी सहज, सक्रिय और प्रकृति के हर रंग को महसूस करने वाला।










