लोकायुक्त का डंडा फिर चला, धार में तीन सहकारी अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी, करोड़ों की बेनामी संपत्ति का खुलासा
20 साल की नौकरी में 65 लाख वेतन, लेकिन 2.41 करोड़ की संपत्ति! आलीशान मकान, फार्म हाउस, जेसीबी, ट्रैक्टर और लग्जरी गाड़ियों तक पहुंची जांच
धार/इंदौर। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने वालों के खिलाफ लोकायुक्त का डंडा एक बार फिर चला है। धार जिले में इंदौर लोकायुक्त पुलिस ने सहकारिता विभाग से जुड़े अधिकारियों और समिति प्रबंधकों के ठिकानों पर बड़ी छापेमारी की। कार्रवाई से सहकारिता महकमे में हलचल मच गई है। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्तियों और निवेश का खुलासा हुआ है।
लोकायुक्त की टीम ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को धार, नालछा, लाबरिया और इंदौर सहित विभिन्न स्थानों पर दबिश दी। कार्रवाई में तीन अधिकारियों से जुड़े ठिकानों की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है।
20 साल की नौकरी, 2.41 करोड़ की संपत्ति!
नालछा आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के प्रबंधक शेरसिंह ठाकुर के नालछा, सोडपुर और मांडव स्थित ठिकानों पर लोकायुक्त ने छापेमारी की। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, करीब 20 वर्षों की सेवा में उनकी वैध वेतन आय लगभग 65 लाख रुपये रही, जबकि चल-अचल संपत्तियों का मूल्य 2 करोड़ 41 लाख 45 हजार रुपये आंका गया है। यह ज्ञात आय से लगभग 271.46 प्रतिशत अधिक बताया गया है।
जांच में करीब 97 लाख रुपये की लागत का दो मंजिला मकान, पत्नी के नाम कृषि भूमि, व्यावसायिक भवन और अन्य संपत्तियों की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा जेसीबी मशीन, महिंद्रा ट्रैक्टर, टीयूवी कार, ऑल्टो कार, बुलेट मोटरसाइकिल और आधुनिक कृषि उपकरण भी जांच के दायरे में हैं।
गोवर्धन लाल मारू के ठिकानों पर भी कार्रवाई
आदिम जाति सेवा सहकारी समिति लाबरिया के प्रबंधक गोवर्धन लाल मारू के ठिकानों पर भी कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई है। शुरुआती छानबीन में करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्ति, दो मंजिला फार्म हाउस, गोदाम, डेयरी, कृषि भूमि और वाहनों से जुड़े विवरण सामने आने का दावा किया गया है। संपत्तियों के वास्तविक मूल्य और आय के स्रोतों की जांच जारी है।
कनीराम मंडलोई के यहां भी जांच
सहकारिता विभाग के सहायक प्रबंधक कनीराम मंडलोई और उनके परिजनों से जुड़ी संपत्तियों की जांच के लिए इंदौर और धार क्षेत्र में भी तलाशी अभियान चलाए जाने की जानकारी सामने आई है। बैंक खातों, भूखंडों की रजिस्ट्री और निवेश संबंधी दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।
अब संपत्तियों के स्रोत पर उठेंगे सवाल
लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं। जांच एजेंसी अब संपत्तियों के स्वामित्व, निवेश के स्रोत और ज्ञात आय के मुकाबले कुल संपत्ति का आकलन कर रही है।
बड़ा सवाल यह है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर सरकारी व्यवस्था की जिम्मेदारी है, उनकी संपत्तियों और आय के बीच इतना अंतर कैसे सामने आया? लोकायुक्त की जांच में आगे और कौन-कौन से खुलासे होते हैं, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।










