सड़कें खोदने में तेजी, पैचवर्क करने में सुस्ती, त्योहार सिर पर, गड्ढों के हवाले संस्कारधानी की सड़कें
अमृत जल योजना और सीवर लाइन के नाम पर गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य मार्गों तक खुदाई, लेकिन मरम्मत की बारी आते ही जिम्मेदार विभागों की रफ्तार क्यों थम जाती है? इंदिरा मार्केट से कांचघर मार्ग बना सवाल
जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर में विकास कार्यों के नाम पर सड़कों की खुदाई का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कहीं अमृत जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई जा रही है तो कहीं सीवर लाइन डालने के नाम पर सड़कें खोदी जा रही हैं। नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के कार्यक्षेत्र में आने वाले शहर के अनेक मार्गों पर खुदाई के बाद सड़क की मरम्मत और पैचवर्क का काम अधूरा दिखाई देता है। नतीजा यह है कि नागरिकों को विकास की सौगात से पहले धूल, गड्ढे और अव्यवस्थित रास्तों से गुजरने की परेशानी झेलनी पड़ रही है।
सबसे बड़ा सवाल इंदिरा मार्केट से कांचघर की ओर जाने वाले मार्ग को लेकर खड़ा हो रहा है। यहां सड़क की खुदाई के बाद पैचवर्क और सड़क की बहाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। त्योहारों का समय नजदीक है, बाजारों में आवाजाही बढ़ रही है, लेकिन सड़क की बदहाल स्थिति नागरिकों और व्यापारियों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
खुदाई के लिए विभाग सक्रिय, पैचवर्क के लिए इंतजार क्यों?
अमृत जल योजना और सीवर लाइन परियोजनाओं के तहत शहर की सड़कों को खोदकर पाइपलाइन बिछाने का काम किया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी सड़क को खोदने की अनुमति देते समय उसकी पूर्ववत मरम्मत की समय-सीमा भी तय की जाती है? यदि तय होती है तो उसका पालन कौन सुनिश्चित कर रहा है?
नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और संबंधित निर्माण एजेंसियों के बीच आखिर ऐसी कौन-सी समन्वय की कमी है कि खुदाई के बाद सड़कें लंबे समय तक बदहाल रहती हैं? क्या ठेकेदारों के भुगतान से पहले पैचवर्क की गुणवत्ता और पूर्णता की जांच होती है? यदि होती है तो शहर की सड़कों पर यह स्थिति क्यों दिखाई दे रही है?
त्योहारों में जनता धूल और गड्ढों से करेगी स्वागत?
त्योहारों के अवसर पर शहर के बाजारों और प्रमुख मार्गों पर नागरिकों की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे समय में सड़कों की बदहाली केवल असुविधा नहीं, बल्कि दुर्घटनाओं और यातायात अव्यवस्था का कारण भी बन सकती है। धूल उड़ती सड़कों और अधूरे पैचवर्क के बीच नागरिक आखिर किससे राहत की उम्मीद करें?
एक ओर शहर को स्मार्ट और व्यवस्थित बनाने की योजनाएं संचालित हो रही हैं, दूसरी ओर खुदाई के बाद सड़क को पूर्ववत करने की बुनियादी जिम्मेदारी ही अधूरी नजर आती है। विकास कार्यों का उद्देश्य नागरिकों को सुविधा देना है, न कि उन्हें महीनों तक परेशानी में रखना।
निगमायुक्त और निर्माण विभाग के अधिकारियों से सीधे सवाल
अब सवाल नगर निगम आयुक्त श्री अग्रिम कुमार और लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से है कि इंदिरा मार्केट से कांचघर मार्ग सहित शहर की अन्य खुदी हुई सड़कों का पैचवर्क कब कराया जाएगा? अमृत जल योजना और सीवर लाइन के ठेकेदारों की जिम्मेदारी कब तय होगी? क्या संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगा जाएगा और अधूरे कार्यों पर कार्रवाई होगी?
विडंबना देखिए, सड़क खोदने के लिए मशीनें और कर्मचारी तत्काल पहुंच जाते हैं, लेकिन उसी सड़क को दोबारा चलने लायक बनाने के लिए नागरिकों को इंतजार करना पड़ता है।
शहर को पाइपलाइन और सीवर जैसी बुनियादी सुविधाएं अवश्य चाहिए, लेकिन क्या इन सुविधाओं के नाम पर सड़कों को अनिश्चितकाल तक बदहाल छोड़ देना भी विकास का हिस्सा है? त्योहारों से पहले यदि जिम्मेदार विभाग सक्रिय नहीं हुए तो नागरिकों के लिए उत्सव की राह भी गड्ढों और धूल से होकर गुजरेगी।
अब देखना यह है कि निगमायुक्त और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी केवल निर्देश जारी करेंगे या सड़कों पर उतरकर पैचवर्क की वास्तविक स्थिति भी देखेंगे? संस्कारधानी की जनता को आश्वासन नहीं, चलने लायक सड़कें चाहिए।










