शहडोल। मध्य प्रदेश की चर्चित आईएएस अधिकारी मिशा सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार चर्चा उनके किसी प्रशासनिक निर्णय को लेकर नहीं, बल्कि कलेक्टर पद का कार्यभार ग्रहण करने से इनकार करने को लेकर हो रही है। राज्य शासन द्वारा हाल ही में जारी आईएएस अधिकारियों की तबादला सूची में उन्हें रतलाम से स्थानांतरित कर शहडोल जिले का कलेक्टर नियुक्त किया गया था, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए इस पद का दायित्व संभालने से मना कर दिया।
गौरतलब है कि 24 जुलाई 2026 की देर रात वल्लभ भवन, भोपाल से प्रदेश के 20 आईएएस अधिकारियों के तबादलों के आदेश जारी किए गए थे। इस प्रशासनिक फेरबदल में कई जिलों के कलेक्टर बदले गए, जिनमें रतलाम की तत्कालीन कलेक्टर मिशा सिंह का नाम भी शामिल था। शासन ने उन्हें शहडोल जिले का नया कलेक्टर बनाया था, लेकिन उन्होंने शासन को अपनी व्यक्तिगत परिस्थितियों से अवगत कराते हुए वहां पदभार ग्रहण करने में असमर्थता जताई।
सूत्रों के अनुसार, मिशा सिंह के अनुरोध पर शासन ने उनके आवेदन पर विचार किया और उनकी नई पदस्थापना नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में अपर आयुक्त के रूप में कर दी। इसके साथ ही शहडोल जिले के लिए अलग से कलेक्टर की नियुक्ति के आदेश भी जारी किए गए।
मिशा सिंह वर्ष 2016 बैच की मध्य प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। प्रशासनिक सेवा में लगभग एक दशक के अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे जबलपुर में अपर कलेक्टर (एडीएम) के पद पर भी कार्य कर चुकी हैं। इसके अलावा विभिन्न जिलों में उनकी प्रशासनिक कार्यशैली की सराहना होती रही है। वे जनसुनवाई, सुशासन, विकास कार्यों की सतत निगरानी तथा सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जानी जाती हैं।
रतलाम कलेक्टर के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण, जनकल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों को गति देने के प्रयासों की भी चर्चा रही। उनकी कार्यशैली को संवेदनशील, अनुशासित और परिणामोन्मुखी माना जाता है।
किसी आईएएस अधिकारी द्वारा कलेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पद का कार्यभार ग्रहण करने से इनकार करना सामान्य प्रशासनिक घटनाओं में कम ही देखने को मिलता है। ऐसे मामलों में शासन संबंधित अधिकारी द्वारा बताए गए कारणों और प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक पदस्थापना का निर्णय लेता है। मिशा सिंह के मामले में भी शासन ने यही प्रक्रिया अपनाते हुए उन्हें नई जिम्मेदारी सौंप दी है।
फिलहाल मिशा सिंह की नई पदस्थापना को लेकर प्रशासनिक गलियारों में चर्चा बनी हुई है। हालांकि, उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस विषय पर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है। शासन द्वारा भी उनकी नई जिम्मेदारी के अनुरूप आदेश जारी कर दिए गए हैं।










