हाईकोर्ट ने डिंडौरी कलेक्टर को फटकारा, कहा- भू-माफिया की तरह काम कर रहा राजस्व विभाग
जबलपुर। जमीन अधिग्रहण के नाम पर अदालत के समक्ष गलत रिपोर्ट पेश करने वाले राजस्व अधिकारियों के रवैये पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। डिंडौरी जिले के बजाग तहसील से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राजस्व विभाग को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि राजस्व विभाग भू-माफिया की तरह काम कर रहा है।
मामला बजाग तहसील के ग्राम मोहतरा निवासी अधिवक्ता प्रसाद तिवारी और उनके पुत्र जितेंद्र तिवारी की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उनकी निजी भूमि के खसरा नंबर 1181, रकबा 1.410 हेक्टेयर तथा खसरा नंबर 1106, रकबा 0.11 हेक्टेयर पर बिना अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी किए और बिना मुआवजा दिए नेशनल हाईवे के लिए सड़क बना दी गई।
सरकारी रिपोर्ट पर उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता धर्मेश चतुर्वेदी ने अदालत को बताया कि एसडीएम बजाग और नायब तहसीलदार की ओर से पेश की गई रिपोर्ट कूटरचित और फर्जी है। वहीं, एक ओर सरकार किसानों को चार गुना मुआवजा देने की बात करती है, जबकि दूसरी ओर राजस्व अधिकारी अदालत में गलत दस्तावेज प्रस्तुत कर रहे हैं।
बेंच ने कहा कि जिस तरह की रिपोर्ट तैयार की गई है, उससे राजस्व अधिकारियों की कार्यकुशलता और मंशा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
कलेक्टर को 14 अगस्त तक हलफनामा देने के निर्देश
मामले में हाईकोर्ट ने डिंडौरी कलेक्टर को 14 अगस्त तक व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी कि दस्तावेजों के साथ हलफनामा पेश नहीं किया गया तो कलेक्टर को 17 अगस्त को स्वयं हाईकोर्ट के समक्ष उपस्थित होना पड़ेगा।
अदालत की सख्त टिप्पणी और निर्देशों के बाद राजस्व विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब कलेक्टर के हलफनामे और संबंधित राजस्व अधिकारियों की रिपोर्ट पर हाईकोर्ट की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।










