कचरा नहीं, अब बनेगा खुशियों का रंग: फूलों से तैयार हो रहा हर्बल गुलाल
जबलपुर। मंदिरों एवं अन्य धार्मिक स्थलों से निकलने वाले फूल अब कचरे का हिस्सा नहीं बनेंगे, बल्कि इन्हीं फूलों से प्राकृतिक और हर्बल गुलाल तैयार कर खुशियों के रंग में बदला जा रहा है। इसी अभिनव पहल का जायजा लेने के लिए आज लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने कंपोस्ट प्लांट का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान मंत्री श्री सिंह ने धार्मिक स्थलों से निकलने वाले फ्लावर वेस्ट के संग्रहण से लेकर उसके प्रसंस्करण और उससे ऑर्गेनिक एवं हर्बल गुलाल तैयार करने की पूरी प्रक्रिया को बारीकी से समझा। संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उन्हें फूलों के पुनर्चक्रण की प्रक्रिया तथा इससे तैयार होने वाले उत्पादों की जानकारी दी।
मंत्री श्री सिंह ने इस पर्यावरण-अनुकूल पहल की सराहना करते हुए कहा कि फूलों जैसे जैविक अपशिष्ट का उपयोग कर उपयोगी उत्पाद तैयार करना ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे एक ओर जहां धार्मिक स्थलों से निकलने वाले फूलों का उचित निस्तारण सुनिश्चित होगा, वहीं दूसरी ओर इनके पुनर्चक्रण से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
इस पहल के अंतर्गत फूलों से तैयार किया जा रहा हर्बल गुलाल प्राकृतिक सामग्री पर आधारित है। फूलों के अपशिष्ट को उपयोगी उत्पाद में बदलने की यह प्रक्रिया स्वच्छता के साथ-साथ रोजगार और नवाचार की संभावनाओं को भी बढ़ावा देने वाली है।
शहर में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और पुनर्चक्रण की दिशा में इस प्रकार के प्रयास महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। धार्मिक स्थलों से निकलने वाले फूलों को सीधे कचरे में जाने से रोककर उनका उपयोगी रूपांतरण पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ शहर की अवधारणा को मजबूती प्रदान करता है।
प्रमुख पहलू
– वेस्ट टू वेल्थ की दिशा में अभिनव पहल।
– धार्मिक स्थलों के फूलों का वैज्ञानिक एवं उपयोगी पुनर्चक्रण।
– फूलों के अपशिष्ट से प्राकृतिक एवं हर्बल गुलाल तैयार करने का प्रयास।
– स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा।
– जैविक कचरे के बेहतर प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम।
फूलों से गुलाल बनाने की यह पहल संदेश देती है कि सही सोच और तकनीक के माध्यम से कचरे को भी उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है। जहां कभी फूलों का अपशिष्ट प्रदूषण का कारण बनता था, वहीं अब वही फूल खुशियों के रंग में बदलकर पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल कायम कर रहे हैं।










