तारीख पर तारीख… ऑनलाइन पेंडेंसी के बीच आवेदक परेशान, दलालों के काम कथित तौर पर तुरंत

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आरटीओ का सिंगल विंडो सिस्टम फेल!

 

तारीख पर तारीख… ऑनलाइन पेंडेंसी के बीच आवेदक परेशान, दलालों के काम कथित तौर पर तुरंत

 

जबलपुर |

 

तमाम ऑनलाइन व्यवस्थाओं और सिंगल विंडो सिस्टम के बावजूद क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में आवेदकों की परेशानी कम होती नजर नहीं आ रही है। आरोप है कि जिन कामों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आसानी से पूरा होना चाहिए, उनके लिए भी आवेदकों को बार-बार आरटीओ कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। स्थिति यह है कि समय और भटकाव से परेशान कुछ आवेदक कथित तौर पर दलालों का सहारा लेने को मजबूर हो रहे हैं।

 

करमेता स्थित आरटीओ परिसर में आवेदकों के साथ दलालों की सक्रियता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आवेदक आवेदन और दस्तावेज जमा करने के बाद संबंधित बाबू के पास प्रक्रिया पूरी करवाते हैं। इसके बाद उन्हें अगली तारीख दे दी जाती है। तारीख आने पर भी काम पूरा नहीं होने की स्थिति में आवेदक दोबारा कार्यालय पहुंचता है। आरोप है कि इसी दौरान यदि वह दलाल के संपर्क में आता है तो उसका काम अपेक्षाकृत तेजी से हो जाता है।

 

तय रकम का आरोप, भुगतान के बाद तेजी से काम

 

मामले में सबसे गंभीर आरोप कथित दलाली की रकम को लेकर हैं। पड़ताल के दौरान सामने आए आरोपों के अनुसार कुछ बिचौलिये विभिन्न कार्यों के लिए अपनी सेवा फीस तय होने की बात कहते हैं। कुछ मामलों में फर्म या संस्थाओं को दिए जाने वाले बिलों में निर्धारित सरकारी शुल्क और कथित सेवा/कमीशन राशि का अलग-अलग उल्लेख किए जाने का भी दावा किया जा रहा है।

 

हालांकि, ऐसे दस्तावेजों और बिलों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। यदि किसी बिल में वास्तव में किसी सरकारी कार्य के बदले अवैध भुगतान का उल्लेख है, तो उसकी जांच संबंधित विभाग और सक्षम एजेंसी द्वारा किया जाना चाहिए।

 

ऑनलाइन पेंडेंसी बनी परेशानी का कारण

 

आवेदकों की शिकायत है कि दस्तावेज और निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन लंबित दिखाई देता है। संबंधित स्तर से प्रक्रिया पूरी किए जाने की जानकारी मिलने के बावजूद अगले स्तर का अप्रूवल लंबित रहने से आवेदक को बार-बार स्थिति जानने के लिए कार्यालय पहुंचना पड़ता है।

 

आरोप है कि इसी पेंडेंसी के बीच कुछ आवेदकों को काम जल्दी कराने के लिए बिचौलियों का रास्ता बताया जाता है। आवेदकों का दावा है कि कथित भुगतान के बाद लंबित काम तेजी से आगे बढ़ जाता है। इन आरोपों की विभागीय जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

 

सीएम हेल्पलाइन तक पहुंच रहे परेशान आवेदक

 

व्यवस्था को लेकर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि कुछ आवेदक समय पर काम नहीं होने के बाद सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराने को मजबूर हो रहे हैं। शिकायत के बाद कार्रवाई होने पर उनका काम आगे बढ़ने का दावा किया जा रहा है।

 

सवाल यह है कि यदि किसी आवेदन का काम निर्धारित ऑनलाइन प्रक्रिया और सिंगल विंडो व्यवस्था के तहत होना है, तो आवेदक को पहले कार्यालय के चक्कर, फिर तारीखों का इंतजार और अंत में शिकायत प्रणाली का सहारा क्यों लेना पड़ रहा है?

 

जांच से सामने आ सकती है वास्तविक तस्वीर

 

आरटीओ की सिंगल विंडो व्यवस्था का उद्देश्य ही आवेदकों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध सेवा उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि दलालों के माध्यम से काम तेजी से होने और आम आवेदकों को लंबी प्रक्रिया से गुजरने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल होगा।

 

पूरे मामले में विभागीय अधिकारियों से यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि लंबित आवेदनों की संख्या कितनी है, निर्धारित समयसीमा क्या है, किस स्तर पर आवेदन लंबित रहते हैं और आवेदकों की शिकायतों के निराकरण की निगरानी किस स्तर पर की जा रही है।

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