लोकायुक्त प्रकरण छिपाकर प्रमोशन लेने का आरोप, दो अधिकारियों पर रिवर्शन की तलवार
पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन ने गृह विभाग को कार्रवाई के लिए लिखा पत्र, वेतन-लाभ की रिकवरी भी संभव
भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन में प्रभारी मुख्य परियोजना यंत्री जेपी पस्तोर और प्रभारी अधीक्षण यंत्री आलोक निगम की पदोन्नति अब सवालों के घेरे में है। गृह विभाग ने दोनों की पदोन्नति में लोकायुक्त प्रकरण की जानकारी छिपाए जाने संबंधी शिकायत के बाद पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है।
जानकारी के अनुसार लोकायुक्त संगठन में जेपी पस्तोर और अन्य के खिलाफ जांच प्रकरण क्रमांक 0426, वर्ष 2024-25 दर्ज है और इसकी जांच चल रही है। आरोप है कि पदोन्नति समिति के समक्ष इस प्रकरण की जानकारी प्रस्तुत नहीं की गई और इसके बाद दोनों अधिकारियों की पदोन्नति कर दी गई।
10 सितंबर को भेजा पत्र
गृह विभाग ने 10 सितंबर को पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक को पत्र भेजकर पदोन्नति प्रक्रिया को नियम विरुद्ध और दोषपूर्ण बताए जाने संबंधी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब मामले में दोनों अधिकारियों के पदोन्नति लाभ की समीक्षा किए जाने की संभावना है।
आलोक निगम पदोन्नति के करीब 10 दिन बाद 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। बताया गया है कि सेवानिवृत्ति से पहले उनका पे-फिक्सेशन भी हुआ था। यदि पदोन्नति निरस्त या रिवर्ट होती है तो प्राप्त अतिरिक्त वेतन एवं अन्य लाभ की वसूली का प्रश्न भी सामने आ सकता है।
वहीं जेपी पस्तोर का नवंबर 2026 में सेवानिवृत्त होना प्रस्तावित है। ऐसे में विभागीय कार्रवाई की स्थिति में उनकी पदोन्नति और उससे जुड़े वेतन लाभ की भी समीक्षा हो सकती है।
करोड़ों के प्रोजेक्ट भी रहे सवालों में
दोनों अधिकारियों के कार्यकाल के दौरान पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के कुछ करोड़ों रुपए के प्रोजेक्टों को लेकर भी सवाल उठे हैं। बालाघाट प्रकरण में संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किए जाने का उल्लेख सामने आया है।
हालांकि पदोन्नति से जुड़े आरोपों और लोकायुक्त प्रकरण की वास्तविक स्थिति का अंतिम निर्धारण संबंधित विभागीय एवं जांच प्रक्रिया के परिणाम के बाद ही होगा।
जेपी पस्तोर ने कहा—कार्यालयीन जानकारी के आधार पर हुआ प्रमोशन
मामले में जेपी पस्तोर ने कहा कि बालाघाट प्रकरण में संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किया गया था। उन्होंने सिवनी के संबंध में कहा कि काम के दौरान वे वहां पदस्थ नहीं थे। उनका कहना है कि पदोन्नति कार्यालयीन सेक्शन द्वारा प्रस्तुत जानकारी के आधार पर हुई थी। उन्होंने कहा कि अब प्रबंध संचालक नियमानुसार जो निर्णय लेंगे, वह उन्हें मंजूर होगा।










