
जबलपुर। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर नगर निगम जबलपुर द्वारा भंवरताल गार्डन स्थित संस्कृति थिएटर में बल्क वेस्ट जनरेटर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने बड़े कचरा उत्पादकों को नए नियमों का पालन करने, अनिवार्य पंजीयन कराने और वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम में महापौर जगत बहादुर सिंह ‘अन्नू’, निगम अध्यक्ष रिकुंज विज, एमआईसी सदस्य, होटल, अस्पताल, मैरिज गार्डन संचालक एवं रेसिडेंशियल सोसायटी के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा कि 1 अप्रैल 2026 से लागू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के तहत सभी बल्क वेस्ट जनरेटर का पंजीयन अनिवार्य है। होटल, अस्पताल, मैरिज गार्डन, बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान और निर्धारित मानकों में आने वाले संस्थानों को शीघ्र पंजीयन कराना होगा। नियमों का पालन नहीं करने वाले व्यक्ति या संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि बदलती उपभोक्ता संस्कृति के कारण ठोस अपशिष्ट की मात्रा लगातार बढ़ रही है। यदि बड़े कचरा उत्पादक अपने स्तर पर कचरे का पृथक्करण और वैज्ञानिक प्रबंधन करेंगे तो शहर को लैंडफिल मुक्त और स्वच्छ बनाया जा सकेगा। कलेक्टर ने होटल संचालकों से प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाने, डिस्पोजेबल सामग्री के स्थान पर री-यूजेबल विकल्प अपनाने, जल संरक्षण पर विशेष ध्यान देने तथा रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने नई तकनीकों को अपनाने पर जोर देते हुए पानी रहित यूरिनल जैसी व्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया।
नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप अब बड़े कचरा उत्पादकों को अपने परिसर में गीला, सूखा, सैनिटरी एवं घरेलू हानिकारक कचरे का पृथक्करण और उसका वैज्ञानिक प्रबंधन करना अनिवार्य होगा। उन्होंने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन की प्रक्रिया सरल है और लगभग 30 मिनट में पूरी हो जाती है। नगर निगम की टीम संबंधित संस्थानों से संपर्क कर रही है तथा नियमों की अनदेखी करने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
महापौर जगत बहादुर सिंह ‘अन्नू’ ने कहा कि “स्वस्थ जीवन के लिए स्वच्छता सबसे महत्वपूर्ण है।” उन्होंने कहा कि जबलपुर की लगभग 17 लाख आबादी से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कचरा निकलता है। सीमित संसाधनों के बीच नगर निगम अकेले शहर को स्वच्छ नहीं रख सकता, इसलिए प्रत्येक नागरिक और संस्थान को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
महापौर ने बताया कि नए नियमों के तहत दो लाख वर्गफीट से अधिक निर्मित क्षेत्र, प्रतिदिन 500 किलोग्राम से अधिक कचरा उत्पन्न करने वाले अथवा 40 हजार लीटर से अधिक जल उपयोग करने वाले परिसरों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), कचरा प्रबंधन संयंत्र तथा वर्षा जल संचयन प्रणाली अनिवार्य होगी। उन्होंने कहा कि शहर से प्रतिदिन निकलने वाले लगभग 900 टन कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन कर प्रतिवर्ष लगभग 50 करोड़ रुपये मूल्य की बिजली का उत्पादन किया जा सकता है, जिससे भविष्य में कचरा निस्तारण की बड़ी समस्या का समाधान होगा।
नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज विज ने कहा कि अधिक मात्रा में कचरा उत्पन्न करने वाले प्रतिष्ठानों की जिम्मेदारी भी अधिक है। उन्होंने सभी बल्क वेस्ट जनरेटर से सरकार और नगर निगम के साथ मिलकर नियमों का पालन करने तथा स्वच्छ जबलपुर के अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 की विस्तृत जानकारी दी गई तथा होटल, अस्पताल, मैरिज गार्डन, संस्थानों और रेसिडेंशियल सोसायटियों के प्रतिनिधियों को ऑनलाइन पंजीयन, कचरे के पृथक्करण और वैज्ञानिक निस्तारण की प्रक्रिया से अवगत कराया गया। जिला प्रशासन और नगर निगम ने सभी संबंधित संस्थानों से शीघ्र पंजीयन कर नियमों का पालन सुनिश्चित करने की अपील की, ताकि जबलपुर स्वच्छता के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित कर सके।










