ईओडब्ल्यू की जांच और पत्रों पर नगर निगम में चुप्पी क्यों , कार्रवाई के लिए आए पत्र महीनों से लंबित, आयुक्त महोदय संज्ञान लेकर कराएं जांच
जबलपुर। नगर निगम जबलपुर में ईओडब्ल्यू से जुड़ी जांच और कार्रवाई संबंधी पत्रों को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा हो रहा है। पूर्व में भी ईओडब्ल्यू की जांच से जुड़े प्रकरणों में नगर निगम को पत्र प्राप्त हुए हैं, लेकिन इन पत्रों पर समय रहते क्या कार्रवाई हुई, यह अब तक स्पष्ट नहीं है। आरोप यह भी हैं कि ऐसे कुछ पत्र नगर निगम कार्यालय में लंबित पड़े रहे।
हाल ही में ईओडब्ल्यू जांच से जुड़े एक मामले में संबंधित अधिकारी को पद से हटाने अथवा कार्रवाई किए जाने को लेकर भोपाल स्तर से पत्र नगर निगम पहुंचा है। इसके बावजूद यदि कार्रवाई लंबित है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर ऐसे पत्रों पर निर्णय लेने में देरी क्यों हो रही है?
मामला किसी व्यक्ति विशेष के पक्ष या विपक्ष का नहीं है। सवाल नगर निगम की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता का है। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के संबंध में ईओडब्ल्यू जैसी जांच एजेंसी से पत्र प्राप्त होता है तो उस पर नियमानुसार समयबद्ध कार्रवाई होना आवश्यक है। यदि कार्रवाई नहीं की जानी है तो उसका स्पष्ट कारण भी सामने आना चाहिए।
पहले भी आ चुके हैं जांच से जुड़े पत्र
नगर निगम में यह कोई पहला मामला नहीं बताया जा रहा है। पूर्व में भी ईओडब्ल्यू की जांच और कार्रवाई से संबंधित पत्र नगर निगम में आने की जानकारी सामने आती रही है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि संबंधित पत्रों पर क्या कार्रवाई की गई, किस स्तर पर उन्हें लंबित रखा गया और यदि कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उसका कारण क्या था?
आयुक्त महोदय, संज्ञान जरूरी
नगर निगम आयुक्त महोदय से अपेक्षा है कि वे इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराएं। जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ईओडब्ल्यू से संबंधित पत्र नगर निगम में कब-कब प्राप्त हुए, उन पर किस स्तर पर कार्रवाई हुई और यदि कोई पत्र लंबित रहा तो उसकी जिम्मेदारी किसकी थी।
यह किसी अधिकारी या कर्मचारी को कठघरे में खड़ा करने का विषय नहीं, बल्कि नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था में नियम, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का विषय है।
यदि पत्र लंबित रखने के पीछे कोई प्रशासनिक कारण है तो वह भी स्पष्ट होना चाहिए और यदि लापरवाही हुई है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
आयुक्त महोदय, अब जरूरत इस बात की है कि इस पूरे प्रकरण पर संज्ञान लेकर जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में ईओडब्ल्यू अथवा किसी अन्य जांच एजेंसी से प्राप्त पत्र कार्यालयों में लंबित न रहें और प्रत्येक पत्र पर नियमानुसार समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।









