लालफीताशाही का नया चमत्कार: बाबूगीरी छोड़िए, अब ‘मानचित्रकार’ संभालेंगे कलेक्ट्रेट के कद्दावर सिंहासन

---Advertisement---

लालफीताशाही का नया चमत्कार: बाबूगीरी छोड़िए, अब ‘मानचित्रकार’ संभालेंगे कलेक्ट्रेट के कद्दावर सिंहासन

जबलपुर की प्रशासनिक गैलरी में इन दिनों एक अजीबोगरीब करिश्मा चर्चा का विषय बना हुआ है। जी हाँ, वही जबलपुर जहाँ व्यवस्था की नब्ज समझने के लिए कभी डिप्टी कलेक्टर या उससे ऊँचे रुतबे वाले अफसरों की फौज तैनात हुआ करती थी, वहाँ अब कागजों पर नक्शे खींचने वाले ‘मानचित्रकार’ सीधे हुकूमत के कड़े तेवर संभालते नजर आ रहे हैं! वाह रे प्रशासनिक गणित, जहाँ स्केल और पेंसिल चलाने वाले सीधे साहबों की कुर्सी पर विराजमान हो गए हैं।

कलेक्टर कार्यालय के गलियारों में अब चाय की चुस्कियों के साथ यही गॉसिप सबसे हॉट है कि जब सारे नियमों को ताक पर रखना ही हो, तो फिर कायदे-कानूनों की लंबी-चौड़ी किताबें किस मर्ज की दवा हैं? जिस ‘जेटीसीसीसी’ और ‘ब्रिक्स’ जैसे मलाईदार और मखमली विभागों की कमान संभालने के लिए कभी तहसीलदार से लेकर डिप्टी कलेक्टर और फाइनेंस विभाग के सीईओ तक पसीना बहाते थे, उस पर अब लोक निर्माण विभाग के मानचित्रकार जितेंद्र जैन साहब का एकछत्र राज स्थापित हो चुका है। लगता है हुक्मरानों ने मान लिया है कि इमारतों के नक्शे बनाने वाला ही अब सीधे प्रशासनिक व्यवस्था का भी नक्शा बदल देगा!

कलेक्ट्रेट के जानकारों का तो यहाँ तक कहना है कि भई, कागजों में ऐसा कौन सा नया पद पैदा हो गया जिसकी हवा किसी को लगी ही नहीं? क्योंकि इतिहास गवाह है कि नोडल अधिकारी जैसी मलाईदार पदवी तो बड़े-बड़े आयोजनों के वक्त एडीएम, सीईओ जिला पंचायत या एसडीएम जैसे भारी-भरकम दिग्गजों के हिस्से आती थी। पर अब लगता है कि प्रशासनिक तरक्की के सारे पुराने पैमाने धरे के धरे रह गए हैं, और मानचित्रकार महोदय ने सीधे शॉर्टकट से ऐसी छलांग लगाई है कि बड़े-बड़े धुरंधर बस ताकते ही रह गए।

जब इस अनोखे कारनामे की सच्चाई जानने के लिए मीडिया ने एडीएम रविशंकर राय साहब से संपर्क साधने की कोशिश की, तो संपर्क हुआ ही नहीं—शायद वे भी इस ‘रचनात्मक’ तबादले के नए नक्शे को समझने में उलझे होंगे कि आखिर यह कौन सा नया प्रशासनिक भूगोल रचा जा रहा है!

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment