सोनोग्राफी मशीन खराब, गर्भवती महिलाओं समेत दर्जनों मरीज परेशान

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सोनोग्राफी मशीन खराब, गर्भवती महिलाओं समेत दर्जनों मरीज परेशान

तीन दिन से बंद पड़ी जांच सुविधा, निजी सेंटरों पर जाने की मजबूरी; मरीजों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ

समाचार सेवा | जबलपुर। विक्टोरिया जिला अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन खराब होने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। बीते करीब तीन दिनों से सोनोग्राफी यूनिट बंद होने के कारण अस्पताल में आने वाले मरीजों को जरूरी जांच के लिए निजी सेंटरों का रुख करना पड़ रहा है। खासतौर पर गर्भवती महिलाओं और तत्काल सोनोग्राफी की जरूरत वाले मरीजों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अस्पताल में चिकित्सक परामर्श के दौरान आवश्यकता के अनुसार सोनोग्राफी जांच लिख रहे हैं, लेकिन यूनिट में पहुंचने पर मरीजों को मशीन खराब होने की जानकारी मिल रही है। ऐसे में मरीज और उनके परिजन जांच कराने के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं।

गर्भवती महिलाओं की जांच पर असर

सोनोग्राफी सुविधा बंद होने का सबसे ज्यादा असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। अस्पताल में भर्ती कुछ महिलाओं के परिजनों का कहना है कि समय पर जांच नहीं होने से इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए निजी सेंटर पर जांच कराना अतिरिक्त बोझ बन रहा है।

निजी सेंटरों का लेना पड़ रहा सहारा

मरीजों के मुताबिक अस्पताल में सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें नजदीकी निजी केंद्रों पर सोनोग्राफी करानी पड़ रही है। इसके लिए कई मरीजों को करीब ₹1,500 तक अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। कुछ मरीज विकल्प के तौर पर सीटी स्कैन जैसी जांच भी करा रहे हैं।

अस्पताल प्रबंधन ने जल्द सुधार का दिया भरोसा

अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. नवीन कोठारी के अनुसार मशीन में तकनीकी खराबी आई है और इसे जल्द दुरुस्त कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शुक्रवार या शनिवार तक सोनोग्राफी जांच की सुविधा दोबारा शुरू हो सकती है।


स्ट्रेचर की जगह शुरू की गई ई-कार्ट सेवा ठप, मरीजों को फिर खींचना पड़ रहा स्ट्रेचर

मेडिकल कॉलेज में मरीजों की परेशानी बढ़ी, परिजन भी स्ट्रेचर खींचने को मजबूर

जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में मरीजों को वार्ड से जांच केंद्र और अन्य स्थानों तक ले जाने की व्यवस्था को लेकर परेशानी सामने आ रही है। स्ट्रेचर पुलर और वार्ड बॉय की कमी के चलते कई बार मरीजों के परिजनों को ही स्ट्रेचर खींचकर ले जाना पड़ता है। गंभीर मरीजों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के मामले में यह स्थिति और अधिक चिंता का विषय बन जाती है।

ई-कार्ट सेवा हुई बंद

मरीजों को अस्पताल परिसर में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए शुरू की गई बैटरी चालित ई-कार्ट सेवा भी फिलहाल बंद बताई जा रही है। अस्पताल परिसर में मरीजों की सुविधा के लिए शुरू की गई यह सेवा अब उपयोग में नहीं आ रही है, जिससे मरीजों को फिर पारंपरिक स्ट्रेचर व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

रखरखाव के अभाव पर उठ रहे सवाल

ई-कार्ट सेवा को मरीजों के लिए सुविधाजनक और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था के रूप में शुरू किया गया था। लेकिन सेवा के बंद होने के बाद इसके रखरखाव और संचालन व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि यदि वैकल्पिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई गई थी तो उसे नियमित रूप से संचालित भी किया जाना चाहिए, ताकि गंभीर मरीजों को अनावश्यक परेशानी न हो।

परिजनों पर बढ़ रहा दबाव

अस्पताल में मरीजों को जांच या वार्ड शिफ्टिंग के लिए स्ट्रेचर से ले जाना पड़ता है। स्टाफ की उपलब्धता नहीं होने पर परिजनों को स्वयं स्ट्रेचर खींचना पड़ता है। गंभीर मरीजों की स्थिति में यह व्यवस्था परिजनों के लिए मानसिक और शारीरिक परेशानी का कारण बन रही है।

मरीजों की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन से ई-कार्ट सेवा को दोबारा शुरू करने तथा स्ट्रेचर संचालन के लिए पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराने की मांग सामने आ रही है।

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