वार्ड सुपरवाइजरों के भरोसे चल रही व्यवस्था, राजीव गांधी वार्ड क्रमांक-6 में सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल
जबलपुर। शहर को स्वच्छता में अव्वल लाने के दावों के बीच राजीव गांधी वार्ड क्रमांक-6 की जमीनी हकीकत अलग ही तस्वीर पेश कर रही है। गलियों में कचरे के ढेर, बजबजाती नालियां और जगह-जगह फैली गंदगी यह सवाल खड़ा कर रही है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी क्षेत्र का निरीक्षण किस तरह कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वार्ड के सुपरवाइजर और सहायक सुपरवाइजर सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं हैं। वहीं संबंधित सीएसआई (Chief Sanitary Inspector) राधा मैडम के बारे में भी लोगों का कहना है कि वे अधिकांश निरीक्षण कार से ही करती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब अधिकारी वाहन से नीचे उतरकर गलियों में नहीं जाएंगे, तो वास्तविक गंदगी, नालियों की बदबू और सफाई व्यवस्था की सच्चाई कैसे सामने आएगी?
लोगों का कहना है कि यदि नगर निगम सचमुच शहर को स्वच्छता में शीर्ष स्थान दिलाना चाहता है, तो अधिकारियों को कुछ समय के लिए चारपहिया वाहन छोड़कर पैदल या दोपहिया से वार्डों का निरीक्षण करना चाहिए। तभी जमीनी हकीकत समझ में आएगी और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय होगी।
वार्डवासियों का कहना है कि सफाई कर्मचारियों की संख्या पर्याप्त है। यदि सीएसआई, सुपरवाइजर और सहायक सुपरवाइजर नियमित रूप से मैदान में उतरकर निगरानी करें, तो हर वार्ड साफ-सुथरा दिखाई दे सकता है। जरूरत केवल फाइलों और कार से निरीक्षण की नहीं, बल्कि धरातल पर सक्रिय उपस्थिति की है।
अब देखना होगा कि नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी इस शिकायत को गंभीरता से लेते हैं या फिर स्वच्छता अभियान केवल दावों तक ही सीमित रहेगा।










