‘अपराध नहीं, अपराधी की ताकत खत्म करेंगे’- DGP राजीव कुमार शर्मा : राजस्थान पुलिस का 6 माह का रिपोर्ट कार्ड

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जयपुर | राजस्थान पुलिस ने वर्ष 2026 की पहली छमाही का प्रदर्शन रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए यह संदेश देने का प्रयास किया है कि राज्य में पुलिसिंग अब केवल अपराध दर्ज करने और आरोपियों को गिरफ्तार करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अपराध की रोकथाम, तकनीक आधारित निगरानी और संगठित अपराध की आर्थिक जड़ों पर प्रहार इसकी नई रणनीति होगी। पुलिस मुख्यालय स्थित राजस्थान पुलिस अकादमी में आयोजित प्रेस वार्ता में पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार शर्मा ने छह महीने की उपलब्धियों का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करते हुए भविष्य का रोडमैप भी साझा किया।

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 की पहली छमाही की तुलना में 2026 की समान अवधि में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज अपराधों में 4.65 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में जहां 99,272 मामले दर्ज हुए थे, वहीं इस वर्ष यह संख्या घटकर 94,652 रह गई। दूसरी ओर पुलिस द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर की गई कार्रवाई के कारण स्थानीय एवं विशेष अधिनियमों के तहत दर्ज मामलों में 4.25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसे पुलिस अपनी सक्रिय और आक्रामक कार्यशैली का परिणाम मान रही है।

हत्या से लेकर पॉक्सो तक अधिकांश गंभीर अपराधों में गिरावट

डीजीपी के अनुसार हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती, लूट, अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो जैसे गंभीर अपराधों में उल्लेखनीय कमी दर्ज हुई है। हत्या के मामलों में 4.41 प्रतिशत, हत्या के प्रयास में 11.17 प्रतिशत, डकैती में 16.28 प्रतिशत तथा लूट की घटनाओं में लगभग 20 प्रतिशत की कमी आई है। महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों में भी गिरावट दर्ज की गई है। दुष्कर्म के मामलों में 13.36 प्रतिशत तथा पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों में 20.90 प्रतिशत की कमी पुलिस ने अपने प्रदर्शन की बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत की।

अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के मामलों में भी लगभग 19 प्रतिशत की कमी दर्ज होना सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एफआईआर की संख्या कम होना ही पर्याप्त संकेतक नहीं माना जा सकता, बल्कि यह भी देखना होगा कि अपराध वास्तव में कम हुए हैं या रिपोर्टिंग के पैटर्न में बदलाव आया है। इसके लिए आने वाले समय में स्वतंत्र विश्लेषण आवश्यक होगा।

केवल गिरफ्तारी नहीं, अब बरामदगी पर भी फोकस

राजस्थान पुलिस ने इस बार केवल अपराध घटने के आंकड़े ही नहीं दिए, बल्कि संपत्ति संबंधी अपराधों में रिकवरी की सफलता भी सामने रखी। लूट के मामलों में बरामदगी 71 प्रतिशत से बढ़कर 79.09 प्रतिशत तक पहुंच गई है। सबसे उल्लेखनीय सुधार नकबजनी के मामलों में देखने को मिला, जहां रिकवरी मात्र 9.58 प्रतिशत से बढ़कर 58.24 प्रतिशत हो गई। चोरी के मामलों में भी बरामदगी 10.34 प्रतिशत से बढ़कर 24.79 प्रतिशत तक पहुंची।

विश्लेषकों के अनुसार यह बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि पीड़ित के लिए अपराधी की गिरफ्तारी जितनी जरूरी होती है, उससे कहीं अधिक महत्व चोरी गया सामान वापस मिलने का होता है। यदि यह सुधार लगातार बना रहता है तो पुलिस के प्रति आम नागरिक का विश्वास और मजबूत हो सकता है।

नशा माफिया पर लगातार दबाव

राजस्थान पुलिस ने स्पष्ट किया कि मादक पदार्थों की सप्लाई चेन तोड़ने, मांग कम करने और नशा मुक्ति को साथ लेकर तीन स्तरीय रणनीति अपनाई गई है। एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि इस बात का संकेत है कि कार्रवाई का दायरा बढ़ाया गया है। राज्यभर में चिन्हित 224 बड़े ड्रग हॉटस्पॉट और किंगपिन के खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया।

सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि केवल गिरफ्तारी तक सीमित रहने के बजाय अवैध संपत्तियों पर भी कार्रवाई की गई। वर्ष 2025 में 55 करोड़ रुपये से अधिक तथा वर्ष 2026 में अब तक 7 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण और कुर्की की कार्रवाई की गई। यही मॉडल भविष्य में और अधिक आक्रामक रूप से लागू करने की घोषणा की गई है।

साइबर अपराध से लड़ाई में तकनीक बनी सबसे बड़ा हथियार

डिजिटल अपराधों की बढ़ती चुनौती को देखते हुए राजस्थान पुलिस ने साइबर सुरक्षा ढांचे का तेजी से विस्तार किया है। सभी 41 पुलिस जिलों में साइबर पुलिस थाने स्थापित किए जा चुके हैं और प्रत्येक थाने में साइबर हेल्पडेस्क शुरू की गई है। 1930 हेल्पलाइन को 53 लाइनों तक विस्तारित किया गया है तथा दो अतिरिक्त व्हाट्सएप नंबर भी शिकायतकर्ताओं की सुविधा के लिए शुरू किए गए हैं।

मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के अनुसार 100 करोड़ रुपये की लागत से राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (R4C) और एआई आधारित 1930 कॉल सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। यह पहल भविष्य में साइबर अपराधों के त्वरित विश्लेषण और रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

राजस्थान पुलिस ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट जैसे नए साइबर अपराधों पर भी प्रभावी कार्रवाई की गई है। वर्ष 2023 से जून 2026 तक 136 मामलों में 174 आरोपियों की गिरफ्तारी तथा 52 करोड़ रुपये से अधिक की राशि होल्ड कराई गई है। इसके अलावा 1.84 लाख गुम मोबाइल ट्रेस किए गए, जिनमें से 61 हजार से अधिक मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को वापस सौंपे जा चुके हैं।

महिला सुरक्षा और अनुसंधान की गति में सुधार

राजस्थान पुलिस ने दावा किया कि महिला सुरक्षा को लेकर अनुसंधान प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक तेज किया गया है। पॉक्सो मामलों में औसत जांच अवधि 78 दिन से घटकर लगभग 51 दिन और दुष्कर्म मामलों में 81 दिन से घटकर 52 दिन रह गई है।

ऑपरेशन गरिमा, ऑपरेशन खुशी, कालिका पेट्रोल यूनिट, एंटी रोमियो स्क्वाड, सुरक्षा सखी और महिला सलाह केंद्र जैसी व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाने का दावा किया गया है। यदि इन अभियानों का असर जमीनी स्तर पर लगातार दिखाई देता है तो महिला सुरक्षा के क्षेत्र में यह एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।

एटीएस और एएनटीएफ ने आतंक, हथियार और फर्जी पहचान नेटवर्क पर कसा शिकंजा

राजस्थान एटीएस ने एक वर्ष के दौरान यूएपीए, अवैध विस्फोटक, हथियार तस्करी और मादक पदार्थों से जुड़े कई मामलों में कार्रवाई की। सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी गतिविधियों की निगरानी करते हुए 728 संदिग्ध व्यक्तियों पर नजर रखी गई तथा 15 युवाओं की डी-रेडिकलाइजेशन प्रक्रिया शुरू की गई। फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोहों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।

पुलिसकर्मियों को मिला पदोन्नति का रास्ता

डीजीपी ने बताया कि लंबे समय से लंबित तकनीकी संवर्ग के कैडर पुनर्गठन को मंजूरी मिलने से चालक, बैंड और घुड़सवार शाखा सहित तकनीकी कर्मचारियों के लिए पदोन्नति के नए अवसर खुलेंगे। 403 पदों के पुनर्गठन को पुलिस संगठन के मनोबल के लिए बड़ा निर्णय माना जा रहा है।

अब अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ना होगा सबसे बड़ा लक्ष्य

प्रेस कॉन्फ्रेंस का सबसे महत्वपूर्ण संदेश भविष्य की रणनीति को लेकर रहा। डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया कि अब पुलिस का फोकस केवल अपराधियों को जेल भेजना नहीं बल्कि उनकी अवैध संपत्तियों को कुर्क कर आर्थिक रूप से कमजोर करना होगा। बड़े ड्रग माफिया, रंगदारी वसूलने वाले गैंगस्टर और संगठित अपराध से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ BNSS, BNS तथा PIT-NDPS के प्रावधानों के तहत बड़े पैमाने पर संपत्ति जब्ती अभियान चलाया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर विदेशों में छिपे अपराधियों के प्रत्यर्पण की कार्रवाई भी की जाएगी।

विश्लेषण: आंकड़े सकारात्मक, लेकिन असली परीक्षा आगे

राजस्थान पुलिस का छह माह का रिपोर्ट कार्ड कई मायनों में सकारात्मक संकेत देता है। गंभीर अपराधों में गिरावट, साइबर अपराधों पर तकनीकी निवेश, महिला सुरक्षा में तेज अनुसंधान और ड्रग नेटवर्क पर कार्रवाई निश्चित रूप से उल्लेखनीय उपलब्धियां हैं। हालांकि किसी भी पुलिसिंग मॉडल की वास्तविक सफलता केवल दर्ज अपराधों की संख्या से नहीं बल्कि न्यायालयों में दोषसिद्धि दर, पीड़ितों की संतुष्टि, समयबद्ध न्याय और आम नागरिक की सुरक्षा की भावना से भी तय होती है।

यदि पुलिस भविष्य में घोषित रणनीति के अनुसार संगठित अपराधियों की आर्थिक शक्ति को प्रभावी ढंग से समाप्त करने, साइबर अपराधों पर नियंत्रण बनाए रखने और तकनीक आधारित स्मार्ट पुलिसिंग को जमीनी स्तर तक लागू करने में सफल रहती है, तो राजस्थान देश के अग्रणी पुलिसिंग मॉडल के रूप में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकता है।

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