प्रतिष्ठा पर प्रहार या सुनियोजित साजिश? अजाक्स अध्यक्ष अमित मेहरा ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

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कथित फर्जी अंकसूची के आधार पर वर्षों से झूठी शिकायतें किए जाने का आरोप, ब्लैकमेलिंग और मानसिक प्रताड़ना का भी दावा; दोषियों पर एफआईआर की मांग

जबलपुर। किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा पर लगातार आरोपों के साये पड़ें और उन आरोपों का आधार कथित रूप से कूटरचित दस्तावेज हों, तो मामला केवल व्यक्तिगत विवाद तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की निष्पक्षता और कानून व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़े करता है। ऐसा ही एक मामला नगर निगम जबलपुर के कर्मचारी एवं मध्यप्रदेश अजाक्स (AJAKS) संघ (नगर निगम) के अध्यक्ष अमित मेहरा से जुड़ा सामने आया है।

अमित मेहरा ने संभागायुक्त, पुलिस महानिरीक्षक (आईजी), कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, नगर निगम आयुक्त तथा थाना प्रभारी ओमती सहित विभिन्न वरिष्ठ अधिकारियों को विस्तृत शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि कुछ व्यक्तियों द्वारा उनके नाम से कथित फर्जी आठवीं की अंकसूची तैयार कर वर्षों से विभिन्न शासकीय विभागों में झूठी शिकायतें भेजी जा रही हैं। उनका कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम का उद्देश्य उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल करना, मानसिक रूप से प्रताड़ित करना तथा उन्हें ब्लैकमेल करना है।

शिकायत में नरसिंह कनौजिया, आशीष सैनी, जगदीश बड़गैया, शिव पराग तथा इंदौर निवासी टिटू यादव के नामों का उल्लेख करते हुए उनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता के तहत कठोर वैधानिक कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।

आरटीआई से प्राप्त अभिलेखों का दिया हवाला

अमित मेहरा का दावा है कि सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से प्राप्त दस्तावेज स्पष्ट करते हैं कि उनकी वास्तविक जिला पूर्व माध्यमिक परीक्षा की अंकसूची वर्ष 2004 की है, जबकि शिकायतों में वर्ष 2001-02 की कथित अंकसूची का उपयोग कर भ्रम फैलाया जा रहा है। उनका कहना है कि तथ्यों के बावजूद लगातार झूठी शिकायतें भेजकर उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

पुराने घटनाक्रम का भी किया उल्लेख

शिकायत में कहा गया है कि वर्ष 2022 में भी इसी प्रकार की शिकायतें नगर निगम सहित अन्य विभागों को भेजी गई थीं। अमित मेहरा के अनुसार उस समय उन्होंने पुलिस महानिरीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर कथित ब्लैकमेलिंग और फर्जी दस्तावेजों की जांच की मांग की थी। उनका दावा है कि जांच के दौरान शिकायतकर्ता से पूछताछ भी हुई थी तथा इस संबंध में एक शपथपत्र भी प्रस्तुत किया गया था, जिसमें शिकायतों के पीछे कुछ अन्य लोगों की भूमिका का उल्लेख किया गया था।

न्यायालय में लंबित है मामला

अमित मेहरा ने बताया कि पुलिस स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने 22वें सिविल जज, क्लास-1, जबलपुर के न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया। न्यायालय ने थाना प्रभारी ओमती को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। उनके अनुसार अब तक प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया गया है। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त 2026 को निर्धारित है।

वल्लभ भवन तक पहुंची शिकायत

शिकायत के अनुसार 30 जून 2026 को उन्हें समाचार पत्रों से जानकारी मिली कि इंदौर निवासी टिटू यादव द्वारा 26 जून 2026 को इसी कथित फर्जी अंकसूची के आधार पर वल्लभ भवन, भोपाल स्थित अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव (नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग), नगरीय प्रशासन आयुक्त सहित जबलपुर के महापौर, नगर निगम अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी शिकायत भेजी गई है।

अमित मेहरा का कहना है कि इसके बाद उन्होंने पुनः सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत नगर निगम से संबंधित अभिलेख प्राप्त किए, जिनसे कथित प्रमाणित दस्तावेजों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। उन्होंने पूरे मामले की तकनीकी एवं दस्तावेजीय जांच कर जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका उजागर करने की मांग की है।

“समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट जाएंगे”

अमित मेहरा ने कहा कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई तो वे न्याय की अंतिम चौखट तक जाएंगे और उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर करेंगे।


(नोट: यह समाचार

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