जोन क्रमांक दो के स्वच्छता निरीक्षकों को अहंकार — “हम स्वच्छता में अव्वल हैं”, लेकिन ज़मीनी हकीकत बजबजाती नालियों में सड़ रही है!

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जोन क्रमांक दो के स्वच्छता निरीक्षकों को अहंकार — “हम स्वच्छता में अव्वल हैं”, लेकिन ज़मीनी हकीकत बजबजाती नालियों में सड़ रही है!
मुख्य मार्ग किनारे गंदगी का साम्राज्य, महीनों से नहीं पहुँची नाला गैंग, बारिश से पहले भी नहीं जाग रहा अमला
जबलपुर। नगर निगम के जोन क्रमांक दो के स्वच्छता निरीक्षक भले ही खुद को “स्वच्छता में अव्वल” साबित करने में लगे हों, लेकिन ज़मीनी तस्वीर उनकी कार्यप्रणाली की पोल खोल रही है। महता पेट्रोल पंप के सामने, मदन महल की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर वर्षों से नालियां बजबजा रही हैं। गंदगी, सड़ांध और कचरे का ऐसा आलम है कि राहगीरों का निकलना तक मुश्किल हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को यह सब शायद दिखाई नहीं देता।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नालियों की सफाई महीनों से नहीं हुई। हालत यह है कि नाला गैंग का कहीं कोई पता नहीं है। जगह-जगह चकरे और कचरे के ढेर लगे हुए हैं, वहीं नाली और सड़ा हुआ कचरा एक साथ मिलकर बदबू फैला रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक महीने बाद बारिश का मौसम शुरू होने वाला है, तब भी नगर निगम का अमला आखिर किस बात का इंतजार कर रहा है?
क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि यदि कोई व्यक्ति या पत्रकार इन गंदगी भरी तस्वीरों को दिखाकर जोन क्रमांक दो के एसआई और सीएसआई से सवाल करता है, तो कार्रवाई करने के बजाय वे चिढ़ जाते हैं। मानो गंदगी बताना ही अपराध हो। जबकि हकीकत सड़क किनारे खुली पड़ी है — नालियां जाम, कचरा सड़ रहा है और स्वच्छता व्यवस्था केवल कागजों और बैठकों तक सीमित है।
विडंबना यह है कि अधिकारी यह दावा करने में पीछे नहीं रहते कि “हमारी ड्यूटी है और हमने जोन को स्वच्छ बना दिया है।” लेकिन जब जनता कहती है कि यदि यह आपकी ड्यूटी है तो फिर इन नालियों की सफाई क्यों नहीं हो रही, तब जवाब मिलता है — “हाँ ठीक है, करवा देंगे।” सवाल यह है कि आखिर हर बार शिकायत के बाद ही सफाई क्यों याद आती है? क्या निरीक्षण केवल फाइलों में हो रहा है?
स्वच्छता सर्वेक्षण के नाम पर शहर में रंग-रोगन और दिखावटी व्यवस्थाएँ तो की जा रही हैं, लेकिन मुख्य मार्गों पर फैली गंदगी नगर निगम के दावों पर सीधा तमाचा साबित हो रही है। यदि अभी भी नालियों की सफाई नहीं हुई तो बारिश के दौरान यही जाम, जलभराव और बीमारी का बड़ा कारण बनेंगी।
जनता अब पूछ रही है कि क्या स्वच्छता का मतलब केवल रिपोर्ट और फोटो तक सीमित है, या वास्तव में जमीन पर सफाई भी होना चाहिए?

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