आयुक्त महोदय जी, जोन क्रमांक 14 के एसआई और सीएसआई को निर्देशित करें कि गाड़ी से उतरकर मेरी तरफ भी दृष्टि डालें… मैं जोन 14 का कचरा बोल रहा हूँ”

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आयुक्त महोदय जी, जोन क्रमांक 14 के एसआई और सीएसआई को निर्देशित करें कि गाड़ी से उतरकर मेरी तरफ भी दृष्टि डालें… मैं जोन 14 का कचरा बोल रहा हूँ”
स्वच्छता सर्वेक्षण की चमक के पीछे छिपी हकीकत, सर्वे ऑफ इंडिया की बाउंड्री से लगी गलियों में पसरा कचरा जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर उठा रहा सवाल
जबलपुर नगर निगम भले ही स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग के दावे कर रहा हो, लेकिन शहर के कई इलाकों की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। जोन क्रमांक 14 में सर्वे ऑफ इंडिया की बाउंड्री से लगी गलियों और सड़कों पर फैला कचरा अब खुद अपनी पीड़ा बयान करता नजर आ रहा है।
अगर यह कचरा बोल पाता, तो शायद यही कहता—
“आयुक्त महोदय जी… जरा अपने जोन क्रमांक 14 के एसआई और सीएसआई से कहिए कि गाड़ियों से उतरकर गलियों में भी चलें। मैं कई दिनों से यहीं पड़ा हूँ, लेकिन किसी की नजर मुझ पर नहीं पड़ती।”
स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वच्छता अभियान केवल मुख्य मार्गों तक सीमित होकर रह गया है। जिन रास्तों से बड़े अधिकारी गुजरते हैं, वहाँ सफाई कर चमक दिखाई जाती है, लेकिन कॉलोनियों और अंदरूनी गलियों की स्थिति बदहाल बनी हुई है। सर्वे ऑफ इंडिया की बाउंड्री से लगे क्षेत्र में सड़कों के किनारे फैला कचरा, गंदगी और दुर्गंध नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े कर रहे हैं।
रहवासियों का कहना है कि सफाई वाहन आते तो हैं, लेकिन कई बार बिना पूरी सफाई किए ही लौट जाते हैं। जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी क्षेत्र का निरीक्षण गाड़ियों में बैठकर ही कर लेते हैं। गलियों में उतरकर वास्तविक स्थिति देखने की जहमत शायद ही कभी उठाई जाती हो। यही कारण है कि कई स्थानों पर कचरे के ढेर दिनों तक पड़े रहते हैं।
लोगों का कहना है कि यदि स्वच्छता सर्वेक्षण केवल मुख्य मार्गों की चमक से तय होना है, तो फिर कॉलोनियों में रहने वाले नागरिकों की परेशानियों का क्या? असली स्वच्छता तब दिखाई देगी जब अधिकारी गलियों तक पहुंचेंगे, जमीन पर उतरकर निरीक्षण करेंगे और हर क्षेत्र को समान प्राथमिकता देंगे।
जोन क्रमांक 14 का यह फैला कचरा अब सिर्फ गंदगी नहीं, बल्कि लापरवाही का प्रतीक बन चुका है। वह मानो प्रशासन से सवाल कर रहा है—
“क्या मैं सिर्फ इसलिए अनदेखा हूँ क्योंकि मैं किसी वीआईपी मार्ग पर नहीं पड़ा?”
अब देखना यह होगा कि आयुक्त महोदय इस ओर संज्ञान लेते हैं या फिर स्वच्छता सर्वेक्षण की चमक में कॉलोनियों की बदहाली यूँ ही दबती रहेगी।

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