बूंदी, शहर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में से एक, पूर्व नरेश राव सूरजमल हाडा की छतरी (मंदिर), जो हाल ही में खंडित की गई थी, अब उसी स्थान पर पुनः निर्मित होगी। इस निर्णय का श्रेय संघर्ष समिति की अथक प्रयासों और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक को जाता है। संघर्ष समिति के अक्षय हाडा ने बताया कि शुक्रवार को दोपहर 12:15 बजे भूमि पूजन के बाद छतरी (मंदिर) का निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएगा। इस छतरी को उसकी पुरानी वास्तुकला और आकार में ही पुनः निर्मित किया जाएगा।
संघर्ष की शुरुआत: 600 साल पुरानी धरोहर का खंडन
राव सूरजमल हाडा की 600 साल पुरानी छतरी (मंदिर) 20 सितंबर 2024 को प्रस्तावित ग्रीन एयरफील्ड एयरपोर्ट परियोजना के चलते खंडित कर दी गई थी। इस घटना ने स्थानीय समाज और धरोहर प्रेमियों में गहरी नाराजगी पैदा की। इस छतरी का ऐतिहासिक महत्व देखते हुए, इसे हटाना लोगों की आस्था और संस्कृति पर चोट माना गया। राज्य सरकार द्वारा किए गए इस कदम का विरोध तेज़ी से बढ़ा, और यह मुद्दा जनता के व्यापक समर्थन के साथ एक बड़े आंदोलन में बदल गया।

सरकार की कार्रवाई और निलंबन
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस घटना पर कड़ा विरोध जताया, जिसके परिणामस्वरूप राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया। हालांकि, निलंबन के बाद भी सर्वसमाज ने मांग जारी रखी कि छतरी (मंदिर) को उसी स्थान पर पुनः स्थापित किया जाए। इस मांग को लेकर हवन-पूजन और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन लगातार चलता रहा, और संघर्ष समिति ने इसे प्रमुख मुद्दा बनाते हुए राज्य सरकार पर दबाव बनाना जारी रखा।
समाधान की दिशा में कदम: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की बैठक
गुरुवार को कोटा में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कैंप कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें कलेक्टर कोटा रविंद्र गोस्वामी, कलेक्टर बूंदी अक्षय गोदारा, ओम बिरला के ओएसडी राजीव दत्ता, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की टीम, और संघर्ष समिति के प्रमुख सदस्य शामिल हुए। बैठक में मुख्य चर्चा का विषय छतरी (मंदिर) के स्थान को लेकर था। संघर्ष समिति के अक्षय हाडा ने बैठक में एयरपोर्ट के प्रस्तावित रनवे और छतरी के स्थान की तकनीकी जानकारी साझा की, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि छतरी एयरपोर्ट के रनवे के काम में बाधा नहीं डाल रही है। छतरी रनवे से 300 मीटर दूर स्थित है और यह किसी भी प्रकार की रुकावट नहीं पैदा करेगी।
इस जानकारी के बाद, बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि छतरी (मंदिर) को उसके मूल स्थान पर ही पुनः निर्मित किया जाएगा। यह संघर्ष समिति और स्थानीय जनता की बड़ी जीत के रूप में देखा गया। शुक्रवार को दोपहर 12:15 बजे भूमि पूजन के साथ निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।

संघर्ष समिति की भूमिका और भविष्य की योजना
संघर्ष समिति के अध्यक्ष ब्रिगेडियर भूपेश सिंह हाडा और उपाध्यक्ष अक्षय हाडा ने इस संघर्ष को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने लगातार स्थानीय और राज्य स्तरीय अधिकारियों से संपर्क बनाए रखा और इस मुद्दे को मीडिया में भी प्रमुखता से उठाया। संघर्ष समिति ने यह सुनिश्चित किया कि इस ऐतिहासिक धरोहर का सम्मान बरकरार रहे और इसे उसी स्थान पर फिर से खड़ा किया जाए, जहां यह सदियों से खड़ी थी।
सांस्कृतिक धरोहर की पुनर्स्थापना की दिशा में एक कदम
राव सूरजमल हाडा की छतरी (मंदिर) का पुनर्निर्माण सिर्फ एक संरचना का पुनर्स्थापन नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर और जनता की आस्था का प्रतीक है। इस छतरी का पुनर्निर्माण न केवल ऐतिहासिक महत्व को बचाने का प्रयास है, बल्कि यह संघर्ष समिति और जनता के समर्पण का भी उदाहरण है।
शुक्रवार को होने वाले भूमि पूजन के बाद, यह छतरी (मंदिर) एक बार फिर उसी स्थान पर अपनी ऐतिहासिक पहचान के साथ खड़ी होगी, जहां से इसे हटाने का प्रयास किया गया था।













