बिना दस्तावेज ट्रांसफर हो गईं 56 बाइक और 28 कारें, परिवहन विभाग में हड़कंप

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बिना दस्तावेज ट्रांसफर हो गईं 56 बाइक और 28 कारें, परिवहन विभाग में हड़कंप

स्क्रैप पॉलिसी में 50% की जगह 65% से अधिक छूट का मामला; चार दिन में 100 से ज्यादा वाहन ऑटो-अप्रूव

  जबलपुर

परिवहन विभाग में ऑटो-अप्रूवल व्यवस्था शुरू होने के बाद वाहन स्वामित्व हस्तांतरण की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, पिछले चार दिनों में 100 से अधिक वाहनों का ट्रांसफर ऑटो-अप्रूवल के माध्यम से हो चुका है। इनमें 56 मोटरसाइकिल, 28 कार, 8 मालवाहक वाहन, 2 बस और 2 कृषि वाहन शामिल हैं।

मामला इसलिए गंभीर है, क्योंकि ऑनलाइन प्रक्रिया में जरूरी दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विशेष रूप से कृषि ट्रैक्टरों के स्वामित्व हस्तांतरण में कृषि भूमि से संबंधित दस्तावेज और किसान बही अपलोड होना जरूरी है। आरोप है कि ऑटो-अप्रूवल व्यवस्था में आवश्यक दस्तावेजों के बिना ही ट्रांसफर की प्रक्रिया आगे बढ़ने की स्थिति बन रही है।

किसान बही नहीं दिखी तो उठे सवाल

परिवहन विभाग के नियमों के मुताबिक कृषि ट्रैक्टर के स्वामित्व हस्तांतरण के दौरान यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि वाहन का उपयोग कृषि कार्य के लिए किया जा रहा है। इसके लिए कृषि भूमि संबंधी दस्तावेज और किसान बही जैसे दस्तावेज महत्वपूर्ण हैं।

विभागीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, ऑटो-अप्रूवल व्यवस्था में कार्यालय वेरिफिकेशन के दौरान सभी जरूरी दस्तावेज दिखाई नहीं दे रहे हैं। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि व्यावसायिक उपयोग में आने वाले ट्रैक्टर भी कृषि श्रेणी में ट्रांसफर हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो इससे टैक्स निर्धारण और राजस्व पर सीधा असर पड़ सकता है।

स्क्रैप पॉलिसी में 65 फीसदी से ज्यादा छूट का मामला

ऑटो-अप्रूवल व्यवस्था में स्क्रैप पॉलिसी को लेकर भी सवाल उठे हैं। सरकार की निर्धारित व्यवस्था के अनुसार पुराने वाहन स्क्रैप कराने पर नए वाहन के टैक्स में निर्धारित सीमा तक छूट का प्रावधान है। लेकिन विभाग के सामने ऐसे मामले आने की बात कही जा रही है, जिनमें सॉफ्टवेयर गणना के दौरान 65 प्रतिशत से अधिक छूट ऑटो-अप्रूव होने की स्थिति बनी।

एक मामले में पोर्टल पर सामान्य टैक्स की गणना होने के बावजूद स्क्रैप सर्टिफिकेट के आधार पर निर्धारित सीमा से अतिरिक्त छूट दिए जाने की बात सामने आई। इसके बाद परिवहन विभाग ने संबंधित वाहन मालिक से अतिरिक्त राशि जमा कराने की कार्रवाई की।

वेरिफिकेशन में सिर्फ तीन फील्ड दिखने का दावा

आरटीओ जबलपुर ऋषि शर्मा के अनुसार, ऑनलाइन ओटीपी आधारित स्वामित्व हस्तांतरण आवेदनों में कार्यालय वेरिफिकेशन स्तर पर केवल तीन फील्ड के प्रपत्र दिखाई दे रहे हैं। उनके अनुसार क्रेता-विक्रेता के पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र और कृषि ट्रैक्टर के मामले में कृषि भूमि संबंधी दस्तावेज जैसे जरूरी प्रारूप दिखाई नहीं देने की स्थिति सामने आई है।

“ऑनलाइन ओटीपी से होने वाले वाहनों के स्वामित्व अंतरण के आवेदनों में कार्यालय वेरिफिकेशन स्तर पर केवल तीन फील्ड के प्रपत्र दिखाई दे रहे हैं। अन्य जरूरी प्रारूप, जैसे क्रेता-विक्रेता का पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र तथा कृषि ट्रैक्टर के मामले में कृषि भूमि संबंधी दस्तावेज दिखाई नहीं देने की बात सामने आई है। इससे कर अपवंचन की पूर्ण संभावना है।”

ऋषि शर्मा, आरटीओ, जबलपुर

50 से ज्यादा सेवाएं ऑटो-अप्रूवल मोड पर

वाहन-4.0 पोर्टल पर परिवहन विभाग की करीब 50 सेवाओं को ऑटो-अप्रूवल मोड में जोड़ा गया है। इनमें ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े कार्य, वाहन स्वामित्व हस्तांतरण, एनओसी, विशेष परमिट, डुप्लीकेट परमिट, डुप्लीकेट फिटनेस सर्टिफिकेट, हाइपोथिकेशन, टैक्स, लर्निंग लाइसेंस, डुप्लीकेट लाइसेंस, नाम-पता-जन्मतिथि में सुधार, फोटो-हस्ताक्षर में सुधार, मोबाइल नंबर अपडेट, इंटरनेशनल ड्राइविंग परमिट और पीएसवी बैज जैसी सेवाएं शामिल हैं।

ऑटो-अप्रूवल से जहां प्रक्रियाओं को तेज करने का उद्देश्य है, वहीं जरूरी दस्तावेजों के सत्यापन में तकनीकी कमी की स्थिति में राजस्व नुकसान और नियमों के दुरुपयोग का जोखिम भी सामने आ सकता है। ऐसे में विभाग के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ऑटो-अप्रूवल के बावजूद अनिवार्य दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर और किस तरह सुनिश्चित किया जा रहा है।

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