₹65 हजार वेतन, पढ़ाने के लिए ₹4,500 की ‘भाड़े की मैडम’!
हेडमास्टर खुद ड्यूटी से नदारद, वर्षों से युवती संभाल रही थी स्कूल की कक्षा; निलंबन के निर्देश
मुरैना। सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पहाड़गढ़ ब्लॉक के पोखर का पुरा प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ हेडमास्टर अमरलाल रावत पर आरोप है कि वे स्वयं नियमित रूप से विद्यालय नहीं आते थे और उनकी जगह एक युवती को महज ₹4,500 प्रतिमाह देकर बच्चों को पढ़ाने के लिए रखा गया था। जबकि हेडमास्टर को करीब ₹65 हजार प्रतिमाह वेतन मिलने की बात सामने आई है।
शनिवार को जिला शिक्षा अधिकारी बीएस इंदौलिया ने विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान हेडमास्टर विद्यालय से अनुपस्थित मिले, जबकि कक्षा में प्रीति रावत नामक युवती बच्चों को पढ़ाते हुए मिली। पूछताछ में युवती ने बताया कि उसे हेडमास्टर ने ₹4,500 मासिक मेहनताने पर पढ़ाने के लिए रखा है।
बच्चों ने खोली व्यवस्था की पोल
निरीक्षण के दौरान बच्चों ने अधिकारियों को बताया कि विद्यालय में मैडम ही पढ़ाने आती हैं, जबकि हेडमास्टर कभी-कभार दिखाई देते हैं। बच्चों के अनुसार हेडमास्टर ने उन्हें कभी नियमित रूप से नहीं पढ़ाया।
मामले की गंभीरता इस बात से भी बढ़ जाती है कि विद्यालय में कोई महिला शिक्षक पदस्थ नहीं है। इसके बावजूद एक निजी युवती द्वारा विद्यालय में बच्चों को पढ़ाया जा रहा था।
दो जनशिक्षकों की भूमिका पर भी सवाल
जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार, प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित दो जनशिक्षकों की भूमिका और निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। मामले में दोनों जनशिक्षकों को तलब किया गया है।
चार स्कूलों के निरीक्षण में शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल
डीईओ के निरीक्षण में पहाड़गढ़ क्षेत्र के अन्य विद्यालयों में भी विद्यार्थियों की उपस्थिति बेहद कम मिली।
– भगतपुरा ईपीएस मिडिल स्कूल: 449 में केवल 25 विद्यार्थी उपस्थित।
– मालीबाजना प्राथमिक विद्यालय: 170 में केवल 7 विद्यार्थी उपस्थित।
– देवीसिंह का पुरा, कैलारस: 45 में केवल 10 विद्यार्थी उपस्थित।
कई विद्यालयों में पालक-शिक्षक संपर्क पंजी और शिक्षक दैनिक डायरी भी उपलब्ध नहीं मिली।
निलंबन के साथ बर्खास्तगी की तैयारी
मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने हेडमास्टर अमरलाल रावत को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी ने हेडमास्टर के विरुद्ध बर्खास्तगी की कार्रवाई का प्रस्ताव भेजे जाने की बात कही है।
इसके अलावा कम छात्र उपस्थिति वाले विद्यालयों के संस्था प्रभारियों की एक-एक वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई भी प्रस्तावित है।
सवाल यह है कि जिस शिक्षक को सरकार बच्चों का भविष्य संवारने के लिए वेतन दे रही थी, वह स्वयं विद्यालय से गायब रहा और बच्चों की पढ़ाई कथित तौर पर ₹4,500 में रखी गई युवती के भरोसे छोड़ दी गई। यह मामला केवल एक शिक्षक की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि विद्यालयी निगरानी और शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।










