शासकीय कार्य में लेन-देन का ऑडियो वायरल, बल्देवगढ़ तहसील के सहायक वर्ग-3 कर्मचारी निलंबित; 25 हजार की रिश्वत का सबूत फिर भी कार्रवाई नहीं, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक सुधीर सोनी पर मेहरबानी क्यों?”
टीकमगढ़/जबलपुर। बल्देवगढ़ तहसील कार्यालय में पदस्थ सहायक वर्ग-3 कर्मचारी अनिल कुमार नापित को शासकीय कार्य में कथित लेन-देन संबंधी बातचीत का ऑडियो वायरल होने के मामले में कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद जबलपुर तहसील रांझी में पूर्व में सामने आए एक कथित रिश्वत प्रकरण को लेकर भी कार्रवाई की मांग उठ रही है।
बल्देवगढ़ मामले में सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो का कलेक्टर ने संज्ञान लिया। एसडीएम बल्देवगढ़ द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन और संबंधित पक्षों के कथनों के आधार पर ऑडियो की जांच कराई गई। जांच में प्रथम दृष्टया शासकीय कार्य को लेकर लेन-देन संबंधी बातचीत सामने आने के बाद इसे शासकीय सेवक के आचरण के विपरीत माना गया।
कलेक्टर ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत अनिल कुमार नापित के निलंबन के आदेश जारी किए। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय टीकमगढ़ रहेगा और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
रांझी के पूर्व राजस्व निरीक्षक के कार्यकाल का मामला भी उठा
इसी कार्रवाई के बीच जबलपुर तहसील रांझी के तत्कालीन राजस्व निरीक्षक सुधीर सोनी के कार्यकाल से जुड़ा एक पुराना मामला भी चर्चा में है। शिकायतकर्ता के अनुसार धारणाधिकार पट्टा प्राप्त करने के लिए सुधीर सोनी सहित अन्य लोगों को कथित रूप से करीब 25 हजार रुपये रिश्वत दी गई थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसके पास इस कथित लेन-देन से संबंधित साक्ष्य भी मौजूद हैं, इसके बावजूद संबंधित कार्य नहीं हुआ।
शिकायतकर्ता के अनुसार इस मामले में ईओडब्ल्यू की जांच भी लंबित है। ऐसे में मांग उठ रही है कि जबलपुर कलेक्टर इस प्रकरण में उपलब्ध शिकायत, दस्तावेज और साक्ष्यों की स्थिति की समीक्षा कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें।
खास बात यह है कि एक ओर शासकीय कार्य में कथित लेन-देन की बातचीत सामने आने पर प्रशासन ने बल्देवगढ़ में तत्काल निलंबन की कार्रवाई की है, वहीं दूसरी ओर जबलपुर के रांझी तहसील से जुड़े पुराने मामले में शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और लंबित जांच की स्थिति भी स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।
हालांकि रांझी मामले में लगाए गए रिश्वत के आरोपों को जांच या सक्षम प्राधिकारी के अंतिम निष्कर्ष से पहले सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। यदि ईओडब्ल्यू जांच लंबित है तो उसके निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगी। इसकी पुष्टि सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर है। इसकी पुष्टि उजला दर्पण समाचार पत्र नहीं करता है।










