इंदौर में शिक्षा विभाग का बड़ा फर्जीवाड़ा
51 फर्जी शिक्षक वर्षों तक लेते रहे सरकारी वेतन, दस्तावेज सत्यापन में खुली पोल
इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर में शिक्षा विभाग से जुड़ा कथित बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, 51 शिक्षक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लंबे समय से सरकारी नौकरी करते रहे और वेतन प्राप्त करते रहे। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
बताया जा रहा है कि इनमें से कई कर्मचारी करीब 20 वर्षों तक विभाग में सेवाएं देते रहे। इस दौरान उन्हें नियमित रूप से सरकारी खजाने से वेतन का भुगतान होता रहा। अब हालिया दस्तावेज सत्यापन अभियान के दौरान उनके प्रमाण-पत्रों और नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच में कथित गड़बड़ियां सामने आई हैं।
बिना सत्यापन के कैसे जारी होता रहा वेतन?
मामले ने विभागीय कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि दस्तावेज फर्जी थे, तो इतने लंबे समय तक उनकी नियुक्ति और सेवा की जांच क्यों नहीं हुई? संबंधित अधिकारियों ने नियुक्ति के समय दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं कराया? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
करोड़ों के वेतन भुगतान का अनुमान
लंबे समय तक सरकारी सेवा में रहने के कारण इन कथित फर्जी शिक्षकों को वेतन और अन्य शासकीय लाभ के रूप में करोड़ों रुपये के भुगतान की आशंका जताई जा रही है। हालांकि वास्तविक वित्तीय नुकसान कितना हुआ, इसका स्पष्ट आंकड़ा विस्तृत जांच और रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद ही सामने आएगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच में फर्जी दस्तावेज तैयार करने, नियुक्ति प्रक्रिया में उनकी भूमिका और इतने वर्षों तक वेतन भुगतान की जिम्मेदारी तय किए जाने की संभावना है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 51 फर्जी नियुक्तियां आखिर दो दशक तक विभाग की नजरों से कैसे बची रहीं और इस पूरे मामले में कौन-कौन जिम्मेदार हैं? जांच पूरी होने के बाद ही पूरे फर्जीवाड़े की तस्वीर साफ हो सकेगी।










