सहायक संचालक राजा राज तिलक धुर्वे के मार्गदर्शन में मत्स्य समितियों को मिल रही नई दिशा

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सहायक संचालक राजा राज तिलक धुर्वे के मार्गदर्शन में मत्स्य समितियों को मिल रही नई दिशा

डोली जलाशय में 15 लाख मत्स्य बीज संचयन से बढ़ा उत्पादन, 21 सदस्यों को हर सप्ताह 4 से 5 हजार रुपये तक की आय

जबलपुर। जिले के कुंडम विकासखंड में मत्स्य पालन अब ग्रामीण आजीविका और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बनता जा रहा है। सहायक संचालक मत्स्योद्योग राजा राज तिलक धुर्वे के मार्गदर्शन एवं विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से मछुआ सहकारी समितियां वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इमलई की मछुआ सहकारी समिति मर्यादित इसका जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है।

अध्यक्ष पवन बर्मन के नेतृत्व में समिति के 21 सदस्य डोली जलाशय के करीब 41.10 हेक्टेयर जलक्षेत्र में व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन कर रहे हैं। शासन द्वारा समिति को वर्ष 2025 से 2035 तक दस वर्षों के लिए मत्स्य पालन एवं मत्स्याखेट का पट्टा आवंटित किया गया है। लंबे समय के पट्टे ने समिति के सदस्यों को आजीविका के क्षेत्र में स्थिरता प्रदान करने के साथ भविष्य की बेहतर आर्थिक योजना बनाने का अवसर दिया है।

छोटी नर्सरी से जलाशय तक वैज्ञानिक तरीके से तैयार हो रही मछलियां

मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए समिति द्वारा पारंपरिक पद्धति के साथ आधुनिक तकनीक का समन्वय किया जा रहा है। रोहू, कतला और मृगल प्रजाति के मत्स्य बीजों को पहले छोटी नर्सरियों में तैयार किया जाता है। जब ये बीज फिंगरलिंग यानी अपेक्षाकृत बड़े और मजबूत आकार में पहुंच जाते हैं, तब इन्हें डोली जलाशय में छोड़ा जाता है।

अब तक जलाशय में लगभग 15 लाख मत्स्य बीज का संचयन किया जा चुका है। बड़े आकार के मत्स्य बीज जलाशय में छोड़ने से उनके जीवित रहने की संभावना बढ़ती है और इससे उत्पादन में भी बेहतर परिणाम मिलते हैं। समिति के सदस्य जलाशय की निगरानी, मत्स्य आहार, मछली पकड़ने और विक्रय की प्रक्रिया को भी व्यवस्थित तरीके से संचालित कर रहे हैं।

हर सदस्य को मिल रही 4 से 5 हजार रुपये साप्ताहिक आय

मत्स्य पालन के इस संगठित मॉडल का सीधा आर्थिक लाभ समिति के सदस्यों को मिल रहा है। वर्तमान में समिति के प्रत्येक सदस्य को प्रति सप्ताह लगभग 4 हजार से 5 हजार रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है। इससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

सहायक संचालक मत्स्योद्योग राजा राज तिलक धुर्वे ने बताया कि विभाग का उद्देश्य केवल मत्स्य उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि मछुआरों को शासन की योजनाओं से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी है। इसी दिशा में समिति के सदस्यों को किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके साथ ही मछुआरों को ‘बचत सह राहत योजना’ से भी जोड़ा गया है, जिससे विपरीत परिस्थितियों में उन्हें आर्थिक सहारा मिल सके।

एफएफपीओ से मिला 2 लाख रुपये का अनुदान

समिति को एफएफपीओ के माध्यम से 2 लाख रुपये का शासकीय अनुदान भी प्राप्त हुआ है। विभागीय योजनाओं का लाभ मिलने से समिति के सदस्यों को मत्स्य पालन के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने में सहायता मिल रही है। इससे स्पष्ट है कि योजनाओं का सही क्रियान्वयन और हितग्राहियों तक सीधा लाभ पहुंचने पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी जा सकती है।

फूटाताल तालाब में भी विभागीय अधिकारियों ने लिया जायजा

इसी क्रम में संयुक्त संचालक मत्स्योद्योग गिरीश मेश्राम ने फूटाताल तालाब का भ्रमण कर मछुआ मजदूर सहकारी समिति द्वारा किए जा रहे मत्स्य पालन एवं उत्पादन कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने समिति सदस्यों से मत्स्य बीज संचयन, मछली उत्पादन, मत्स्य आहार, मछली पकड़ने और विक्रय व्यवस्था की जानकारी ली।

संयुक्त संचालक ने तालाब के जलक्षेत्र और उपलब्ध मत्स्य संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर समिति सदस्यों से चर्चा की। उन्होंने वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित तरीके से मत्स्य पालन, तालाब की स्वच्छता एवं जल गुणवत्ता बनाए रखने तथा उत्पादन बढ़ाकर समिति सदस्यों की आय में वृद्धि करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया।

उन्होंने सहायक संचालक मत्स्योद्योग राजा राज तिलक धुर्वे को विभागीय योजनाओं का लाभ पात्र मछुआरों और समिति सदस्यों तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए।

योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से बदल रही तस्वीर

इमलई और फूटाताल की गतिविधियां बताती हैं कि यदि मत्स्य संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन, बेहतर बीज संचयन, उचित आहार और बाजार व्यवस्था के साथ किया जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में मत्स्य पालन आय का मजबूत माध्यम बन सकता है।

राजा राज तिलक धुर्वे के विभागीय मार्गदर्शन में शासन की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और मछुआ समितियों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के प्रयासों का परिणाम अब दिखाई देने लगा है। डोली जलाशय में 15 लाख मत्स्य बीज का संचयन और 21 सदस्यों को नियमित आय मिलना इसी बदलाव की तस्वीर पेश करता है। इमलई की समिति आज न केवल अपने सदस्यों के लिए बल्कि जिले के अन्य मछुआरों के लिए भी सहकारिता, वैज्ञानिक मत्स्य पालन और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बन रही है।

उल्लेखनीय है कि निरीक्षण के दौरान मत्स्य निरीक्षक सुनीता ढोके तथा समिति के सदस्य हरिओम, अवधेश, अज्जू, लक्ष्मण सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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