105 साल की बुजुर्ग के सामने जमीन पर बैठे कलेक्टर लाठी के सहारे जनसुनवाई में पहुंचीं कमला बाई की दर्दभरी कहानी सुनी, कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल की सादगी ने जीता लोगों का दिल

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105 साल की बुजुर्ग के सामने जमीन पर बैठे कलेक्टर लाठी के सहारे जनसुनवाई में पहुंचीं कमला बाई की दर्दभरी कहानी सुनी, कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल की सादगी ने जीता लोगों का दिल

 

गुना। कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक ऐसा मानवीय दृश्य सामने आया, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। 105 वर्षीय कमला बाई बैरागी अपनी फरियाद लेकर लाठी के सहारे जनसुनवाई में पहुंचीं। उम्र के इस पड़ाव पर भी अपनी समस्या के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंची बुजुर्ग महिला को देखकर गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल खुद उनके पास पहुंचे और जमीन पर बैठकर आत्मीयता से उनकी पूरी बात सुनी।

 

कलेक्टर के इस सहज और संवेदनशील व्यवहार को देखकर जनसुनवाई में मौजूद लोग भी प्रभावित हुए। प्रशासनिक पद की औपचारिकता से अलग कलेक्टर का बुजुर्ग महिला के सामने जमीन पर बैठना यह संदेश देता नजर आया कि जनसुनवाई का केंद्र आम आदमी और उसकी समस्या ही है।

 

लाठी के सहारे पहुंचीं, सुनाई अपनी पीड़ा

 

कमला बाई ने कलेक्टर को बताया कि उनके पति का निधन करीब 20 वर्ष पहले हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद उनके बेटों ब्रजवल्लभ और कोमल ने रानी खेजरा स्थित उनकी जमीन को करीब चार लाख रुपये में बेच दिया। बुजुर्ग महिला का कहना है कि जमीन की राशि बेटों ने आपस में रख ली और इसके बाद उन्हें परिवार में कथित तौर पर परेशानियों का सामना करना पड़ा।

 

105 वर्ष की उम्र में अपनी पीड़ा लेकर जनसुनवाई में पहुंची कमला बाई की बात कलेक्टर ने बेहद गंभीरता और धैर्य के साथ सुनी।

 

संवेदनशीलता बनी चर्चा का विषय

 

जनसुनवाई में कलेक्टर का बुजुर्ग महिला के सामने बैठकर उसकी बात सुनना वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। लोगों ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी का इस तरह सहज होकर बुजुर्ग की बात सुनना आमजन के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान की मिसाल है।

 

जनसुनवाई का उद्देश्य ही यही है कि आम नागरिक अपनी समस्या सीधे प्रशासन के सामने रख सके और उसकी शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई हो। 105 वर्षीय कमला बाई के मामले में भी उनकी शिकायत को गंभीरता से सुना गया और संबंधित प्रकरण में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई।

 

कलेक्टर की यह तस्वीर जनसुनवाई की उस भावना को सामने लाती है, जहां पद और प्रोटोकॉल से ऊपर एक बुजुर्ग की पीड़ा को महत्व दिया गया।

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