आइसक्रीम के नाम पर ‘जहर’ बेचने का खेल! एडीएम रविशंकर राय ने कसी लगाम
जांच में अमानक निकली आइस कैंडी, विक्रेता और निर्माता पर 1 लाख 20 हजार रुपए का जुर्माना
उजला दर्पण | जबलपुर
मिठास के नाम पर बच्चों और उपभोक्ताओं तक पहुंच रही आइस कैंडी की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। गोहलपुर चौक स्थित बेकर बाइट्स से लिए गए आइस कैंडी के नमूने की जांच में वह निर्धारित खाद्य मानकों पर खरी नहीं उतरी। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर हुई सुनवाई के बाद एडीएम रविशंकर राय ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए दुकान संचालक एम. अंसारी पर 20 हजार रुपए और अहमदाबाद स्थित हैवमोर आइसक्रीम प्राइवेट लिमिटेड के संचालक पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। दोनों पर कुल 1 लाख 20 हजार रुपए की शास्ति अधिरोपित की गई है।
मिठास के पीछे छिपी अमानकता हुई उजागर
खाद्य अधिकारी विनोद कुमार धुर्वे के प्रतिवेदन के अनुसार 23 मई 2015 को गोहलपुर स्थित बेकर बाइट्स से आइस कैंडी का नमूना लिया गया था। नमूना जांच के लिए भोपाल स्थित खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया। खाद्य विश्लेषक की 1 नवंबर 2023 की रिपोर्ट में नमूना निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया और उसे अमानक घोषित किया गया।
प्रकरण में संबंधित खाद्य कारोबारी को नमूने के पुनः परीक्षण के लिए अपील का अवसर भी दिया गया था, लेकिन निर्धारित 30 दिनों की अवधि में इसका उपयोग नहीं किया गया। निर्माता को भी अपील के अधिकार की सूचना दी गई थी, मगर निर्धारित अवधि में वहां से भी अपील प्रस्तुत नहीं की गई।
इसके बाद हुई सुनवाई में एडीएम रविशंकर राय ने उपलब्ध दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करते हुए विक्रेता पर 20 हजार तथा निर्माता कंपनी के संचालक पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया।
कार्रवाई का संदेश साफ है—मिठास के नाम पर उपभोक्ता की सेहत से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
हालांकि जांच रिपोर्ट में उत्पाद को अमानक बताया गया है, इसलिए ‘जहर’ शब्द यहां खबर की तीखी हेडिंग में रूपक के तौर पर इस्तेमाल किया गया है, न कि यह दावा करने के लिए कि आइस कैंडी जहरीली साबित हुई थी।










