नेशनल लोक अदालत में समझाइश, संवाद और परिवार के सहयोग से दो दंपत्तियों ने फिर थामा एक-दूसरे का हाथ

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6 साल की दूरी मिटाकर फिर एक हुए पति-पत्नी

 

नेशनल लोक अदालत में समझाइश, संवाद और परिवार के सहयोग से दो दंपत्तियों ने फिर थामा एक-दूसरे का हाथ

 

जबलपुर। नेशनल लोक अदालत केवल विवादों के कानूनी निराकरण का माध्यम ही नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों को बचाने और परिवारों को फिर से जोड़ने का भी सशक्त मंच बन रही है। 12 सितंबर को जिला न्यायालय जबलपुर में आयोजित नेशनल लोक अदालत में आपसी समझाइश, संवाद और पारिवारिक सहयोग के माध्यम से दो वैवाहिक विवादों का सुखद समाधान हुआ। लंबे समय से अलग रह रहे दोनों दंपत्तियों ने पुराने मतभेद भुलाकर पुनः साथ रहने का निर्णय लिया।

 

समझाइश से दूर हुए लंबे समय से चले आ रहे मतभेद

 

एमजेसीआर में आवेदिका श्रीमती धंतीबाई, पति जितेन्द्र, निवासी जिला जबलपुर ने अपने वैवाहिक विवाद के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया था। प्रकरण में उनके पति जितेन्द्र भी उपस्थित रहे।

 

सुनवाई के दौरान न्यायाधीश श्रीमती रेणू खेस ने दोनों पक्षों से संवाद करते हुए उन्हें वैवाहिक जीवन के महत्व और आपसी समझ के साथ विवादों को सुलझाने की समझाइश दी। पारिवारिक सहयोग और आपसी बातचीत के बाद पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेद दूर हुए।

 

दोनों ने पुराने विवादों को पीछे छोड़कर नए सिरे से दाम्पत्य जीवन शुरू करने की इच्छा व्यक्त की। पति जितेन्द्र ने अपनी पत्नी धंतीबाई को सम्मानपूर्वक अपने साथ वैवाहिक गृह ले जाने की सहमति दी। वहीं धंतीबाई ने भी अपनी स्वेच्छा से पति के साथ पुनः रहने का निर्णय लिया।

 

समझौते के बाद दोनों परिवारों में खुशी का वातावरण निर्मित हुआ। पति-पत्नी ने भविष्य में प्रेम, सम्मान और सौहार्द के साथ वैवाहिक जीवन बिताने का संकल्प लिया। आपसी राजीनामे के आधार पर प्रकरण का सौहार्दपूर्ण निराकरण किया गया।

 

छह वर्ष बाद फिर साथ आए सोहन और प्रीति

 

इसी नेशनल लोक अदालत में एक अन्य वैवाहिक विवाद का भी भावुक और सुखद समाधान हुआ। लगभग छह वर्षों से अलग रह रहे पति सोहन और पत्नी प्रीति ने आपसी मनमुटाव भुलाकर फिर से साथ रहने का निर्णय लिया।

 

लंबे समय से चले आ रहे विवाद के कारण दोनों के दाम्पत्य जीवन में दूरी बनी हुई थी। लेकिन न्यायालय की समझाइश, आपसी संवाद और परिवार के सहयोग से दोनों के बीच फिर से विश्वास और स्नेह का वातावरण बना।

 

इसके बाद न्यायालय कक्ष में पति-पत्नी ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाकर पुनः साथ रहने, एक-दूसरे का सम्मान करने और सुख-दुःख में साथ निभाने का संकल्प लिया।

 

इस भावुक क्षण के साक्षी न्यायाधीश श्रीमती दीपा पॉल, दोनों पक्षों के परिजन, अधिवक्तागण एवं न्यायालयीन स्टाफ रहे। दोनों के पुनर्मिलन से न्यायालय परिसर में भी खुशी का माहौल दिखाई दिया।

 

विवाद खत्म करने से बड़ी है रिश्ते बचाने की पहल

 

नेशनल लोक अदालत में हुए ये दोनों मामले इस बात का उदाहरण हैं कि संवाद, समझाइश और पारिवारिक सहयोग के माध्यम से कई विवादों को न्यायालय की लंबी प्रक्रिया में जाने से पहले ही सौहार्दपूर्ण तरीके से समाप्त किया जा सकता है।

 

जब एक समझौता केवल मुकदमा खत्म नहीं करता, बल्कि एक परिवार को फिर से जोड़ देता है, तब न्याय की सार्थकता और भी बढ़ जाती है।

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