जल संरक्षण की संवेदनशील सोच और विकास के प्रति दृढ़ संकल्प का परिचायक बना निगमायुक्त का मैदानी निरीक्षण

जबलपुर। जब शहर पर वर्षा की फुहारें बरस रही थीं, तब नगर निगम आयुक्त श्री राम प्रकाश अहिरवार वातानुकूलित कक्षों में बैठकर समीक्षा करने के बजाय स्वयं सड़कों पर उतरकर शहर की नब्ज टटोल रहे थे। उनका यह निरीक्षण केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि जनहित, पर्यावरण संरक्षण और उत्तरदायी नेतृत्व का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया।
निगमायुक्त ने हनुमानताल, अधारताल एवं सुपाताल का गहन निरीक्षण कर पुनरोद्धार एवं सौंदर्यीकरण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये तालाब केवल जलाशय नहीं, बल्कि जबलपुर की सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरणीय संतुलन और आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गुणवत्ता से कोई समझौता न हो तथा सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएँ।
बारिश के बीच शहर के जलभराव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण कर श्री अहिरवार ने यह संदेश दिया कि एक संवेदनशील प्रशासक वही होता है, जो कठिन परिस्थितियों में भी जनता के बीच उपस्थित रहे। उन्होंने वर्षा जल निकासी व्यवस्था का स्वयं अवलोकन किया और मैदानी अमले को चौबीसों घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी नागरिक को जलभराव या आवागमन में कठिनाई का सामना न करना पड़े।
श्री राम प्रकाश अहिरवार का कार्य करने का तरीका निरंतर यह सिद्ध कर रहा है कि विकास केवल योजनाएँ बनाने से नहीं, बल्कि उनके धरातलीय क्रियान्वयन की सतत निगरानी से संभव होता है। जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन, स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं के प्रति उनकी गंभीरता जबलपुर को एक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और विकसित महानगर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन रही है।
नगर निगम के अधिकारी एवं कर्मचारियों के लिए भी उनका यह मैदानी निरीक्षण प्रेरणा का विषय है कि जनसेवा का वास्तविक स्वरूप कार्यालयों की सीमाओं से बाहर निकलकर जनता के बीच रहकर समस्याओं का समाधान करना है। यदि यही कार्यशैली निरंतर बनी रही तो जबलपुर जल संरक्षण, स्वच्छता और सुव्यवस्थित शहरी प्रबंधन के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा।










