जबलपुर के कई सुलभ शौचालयों में महिलाओं की सुविधा के नाम पर बाहर सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन और इंसिनरेटर (नैपकिन बर्निंग मशीन) के स्टिकर तो लगे हैं, लेकिन मौके पर ये सुविधाएं दिखाई नहीं देतीं। यदि ऐसा है, तो यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि महिलाओं की गरिमा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ है।
सबसे अहम बात यह है कि सुलभ शौचालय संचालन के एग्रीमेंट में इन सुविधाओं का स्पष्ट उल्लेख है। इसकी जानकारी संबंधित दस्तावेजों सहित स्वास्थ्य अधिकारी अभिनव मिश्रा और नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार को भी दे दी गई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि नगर निगम इन शर्तों का पालन कब तक सुनिश्चित कराता है और महिलाओं को कागजों में नहीं, बल्कि धरातल पर वास्तविक सुविधाएं कब उपलब्ध होती हैं।
सवाल यह भी है कि जब एग्रीमेंट में सुविधाएं अनिवार्य हैं, तो आखिर वे गायब क्यों हैं? यदि मशीनें कभी लगाई ही नहीं गईं तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है, और यदि लगाई गई थीं तो उनका रखरखाव किसने नहीं किया? केवल स्टिकर लगाकर सुविधाओं का दावा करना जनविश्वास के साथ छल माना जाएगा।
अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग की हालिया कार्रवाई केवल जुर्माने तक सीमित रहती है या एग्रीमेंट की प्रत्येक शर्त का पालन भी कराया जाएगा। नगर निगम के पास अब शिकायत, दस्तावेज और तथ्य—तीनों मौजूद हैं। इसलिए शहरवासियों को उम्मीद है कि जल्द ही सुलभ शौचालयों में महिलाओं के लिए सेनेटरी नैपकिन मशीन, इंसिनरेटर और अन्य आवश्यक सुविधाएं वास्तव में दिखाई देंगी, केवल बोर्ड और स्टिकरों पर नहीं।










