9वें ‘भड़ास’ ओपन माइक का आगाज, कविता-शायरी और संगीत से सजा अभिव्यक्ति का मंच

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9वें ‘भड़ास’ ओपन माइक का आगाज, कविता-शायरी और संगीत से सजा अभिव्यक्ति का मंच

सतना। प्रकृति की गोद में बसे ऐतिहासिक महाराजपुर हेरिटेज में रविवार को साहित्य, संगीत और सृजनात्मक अभिव्यक्ति का मनोहारी संगम देखने को मिला। अवसर था ‘भड़ास’ ओपन माइक के 9वें आयोजन का, जहां कविता, शायरी, संगीत, हास्य और कहानी के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपने मन की भावनाओं, विचारों और अनुभवों को पूरी बेबाकी के साथ शब्दों का रूप दिया।

 

महाराजपुर हेरिटेज और शंखनाद फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने स्थानीय एवं बाहरी प्रतिभाओं को अपनी कला और हुनर के प्रदर्शन के लिए एक ऐसा मुक्त मंच प्रदान किया, जहां अभिव्यक्ति पर किसी प्रकार का बंधन नहीं था। ऐतिहासिक विरासत की छांव और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच सजे इस साहित्यिक आयोजन ने उपस्थित कला एवं साहित्य प्रेमियों को देर तक बांधे रखा।

 

कार्यक्रम में अलग-अलग विधाओं की प्रस्तुतियों ने वातावरण को जीवंत बना दिया। सेतु जैन ने श्रृंगार रस के गायन से सुरों की मिठास घोली, वहीं नीरज सिंह ने अपनी व्यंग्यात्मक कविता के माध्यम से सामाजिक सरोकारों पर तीखे अंदाज में अपनी बात रखी। योगेश अग्रवाल की वीर रस से ओतप्रोत कविता ने श्रोताओं में उत्साह और जोश का संचार किया, जबकि नीरज तिघरिआ की बघेली हास्य कविता ने ठहाकों की गूंज बिखेर दी। कार्यक्रम के कुशल संचालन की जिम्मेदारी रवेंद्र सिंह ने संभाली और अपनी प्रभावी शैली से दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाई।

 

‘भड़ास’ के मंच पर कविता, मुशायरा, स्टैंडअप कॉमेडी, लाइव सिंगिंग-म्यूजिक, मिमिक्री, कहानी और स्वतंत्र अभिव्यक्ति जैसी विविध रचनात्मक विधाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। किसी ने शब्दों से मन की गांठें खोलीं, किसी ने सुरों से भावनाओं को आवाज दी तो किसी ने हास्य और व्यंग्य के माध्यम से समाज की तस्वीर सामने रखी।

 

आयोजन का मूल उद्देश्य ऐसे रचनात्मक मंच का निर्माण करना रहा, जहां प्रतिभागी बिना किसी संकोच और झिझक के अपने विचार, भावनाएं, अनुभव और प्रतिभा को समाज के सामने रख सकें। ‘भड़ास’ ने इसी उद्देश्य को सार्थक करते हुए अभिव्यक्ति को एक नई उड़ान देने का कार्य किया।

 

इस अवसर पर रचना त्रिपाठी, वरुण चमडिया, विष्णु स्वरूप तिवारी, अभिषेक श्रीवास्तव, शिवम तिवारी, प्राजंलि कुशवाहा, विकास खरे, प्रांजल शुक्ला, पिंकी गुप्ता, आकांक्षा साहू, सचिन वर्मा, शुभम शुक्ला, स्मृति शुक्ला, पूजा कुशवाहा, ओमप्रकाश लखेरा, सोमिल तिवारी, नावेद, फरहान, अंकित सोनी, श्रवण गौतम, अंकित वर्मा, सत्यनारायण सहित बड़ी संख्या में कला एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

 

महाराजपुर हेरिटेज की सुरम्य पृष्ठभूमि में सजा यह आयोजन इस बात का साक्षी बना कि जब शब्दों को मंच मिलता है और भावनाओं को स्वर, तो अभिव्यक्ति केवल प्रस्तुति नहीं रहती, बल्कि समाज के मन की आवाज बन जाती है।

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