पुल निर्माण के बिल में 33 लाख की कथित हेराफेरी! EOW का शिकंजा, तत्कालीन इंजीनियरों और ठेकेदार पर FIR
7.37 लाख का अंतिम बिल कूटरचना कर 40.91 लाख रुपये किया, माप पुस्तिका गायब करने और सरकारी दस्तावेजों में छेड़छाड़ के भी आरोप
सिंगरौली/रीवा। मध्यप्रदेश में सरकारी निर्माण कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं का एक और मामला सामने आया है। सिंगरौली जिले में म्यार नदी पर पुल निर्माण के भुगतान में कथित हेराफेरी को लेकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) रीवा ने बड़ी कार्रवाई की है। लोक निर्माण विभाग के तत्कालीन अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुल निर्माण कार्य के अंतिम भुगतान में कथित तौर पर दस्तावेजों के साथ कूटरचना कर लाखों रुपये का अतिरिक्त भुगतान कराने का मामला सामने आया है। आरोप है कि 7 लाख 37 हजार रुपये के अंतिम बिल को बढ़ाकर 40 लाख 91 हजार रुपये कर दिया गया। इस प्रकार करीब 33 लाख 54 हजार रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला उजागर हुआ है।
माप पुस्तिका गायब करने का भी आरोप
जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि निर्माण कार्य में निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं होने पर लगने वाली पेनाल्टी से बचने के लिए माप पुस्तिका (एमबी) को गायब किया गया। इसके साथ ही सरकारी अभिलेखों में काट-छांट और दस्तावेजों में कूटरचना किए जाने की आशंका भी जताई गई है।
तत्कालीन अधिकारियों और ठेकेदार पर FIR
इस मामले में तत्कालीन एसडीओ सुशील कुमार मिश्रा, उपयंत्री चंद्रशेखर तिवारी और संबंधित ठेकेदार फर्म सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना तथा भ्रष्टाचार से संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है। EOW द्वारा मामले से जुड़े दस्तावेजों और भुगतान प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
सरकारी निर्माण कार्यों की निगरानी पर सवाल
पुल निर्माण जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक कार्यों में यदि अंतिम भुगतान के दस्तावेजों में ही कथित तौर पर लाखों रुपये की हेराफेरी होती है, तो निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, मापन प्रक्रिया और भुगतान की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब जांच का विषय यह है कि कथित रूप से बढ़ाए गए बिल को किस स्तर पर स्वीकृति मिली और सरकारी धन के भुगतान में कौन-कौन जिम्मेदार रहा। EOW की आगे की जांच में इस पूरे मामले की परतें खुलने की उम्मीद है।










