नामांतरण के नाम पर ₹25 हजार का खेल, ₹15 हजार लेते बाबू रंगे हाथ गिरफ्तार
तहसील में रिश्वत का ‘रेट कार्ड’! पहले ₹10 हजार वसूले, बाकी ₹15 हजार लेने पहुंचा तो लोकायुक्त ने दबोच लिया
छतरपुर/बक्सवाहा। जमीन के नामांतरण जैसी जरूरी राजस्व प्रक्रिया भी कथित तौर पर रिश्वत के शिकंजे से अछूती नहीं रही। बक्सवाहा तहसील कार्यालय में लोकायुक्त की कार्रवाई ने कथित रिश्वतखोरी के खेल की परतें खोल दी हैं। लोकायुक्त की टीम ने तहसील के बाबू राजेंद्र श्रीवास्तव को फरियादी से 15 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
मामला जमीन के नामांतरण से जुड़ा बताया जा रहा है। फरियादी कृष्णकांत बिलथरे की शिकायत के अनुसार नामांतरण के एवज में कथित रूप से 25 हजार रुपये की मांग की गई थी। आरोप है कि इसमें से 10 हजार रुपये पहले ही लिए जा चुके थे, जबकि शेष 15 हजार रुपये के लिए आज का दिन तय था।
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त ने जाल बिछाया। केमिकल लगे नोट फरियादी को दिए गए। जैसे ही तहसील कार्यालय में कथित तौर पर 15 हजार रुपये बाबू के हाथ पहुंचे, लोकायुक्त टीम ने दबिश देकर उसे मौके पर ही पकड़ लिया।
कार्रवाई के बाद तहसील परिसर में हड़कंप मच गया। जिस कार्यालय में आम नागरिक अपने वैध काम के लिए चक्कर काटते हैं, वहीं रिश्वत की रकम लेते कर्मचारी के पकड़े जाने की खबर ने पूरे राजस्व महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लोकायुक्त टीम ने कथित रिश्वत की रकम बरामद करने के साथ नामांतरण से संबंधित दस्तावेज भी कब्जे में लिए हैं। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।
सवाल सिर्फ ₹15 हजार का नहीं…
यह कार्रवाई उस व्यवस्था पर भी सवाल छोड़ गई है, जहां जमीन के नामांतरण जैसे सामान्य प्रशासनिक काम के लिए भी यदि नागरिकों को कथित रूप से पैसे देने पड़ें, तो पारदर्शिता और जवाबदेही का क्या अर्थ रह जाता है? लोकायुक्त की कार्रवाई ने फिलहाल एक बाबू को कानून के घेरे में ला खड़ा किया है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या तहसील में रिश्वत का यह खेल केवल एक व्यक्ति तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा तंत्र भी काम कर रहा था?
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