
37 वर्षों की सेवायात्रा में निगमायुक्त श्री रामप्रकाश अहिरवार को मानते हैं अपना आदर्श, उनके मार्गदर्शन में बाजार विभाग को दे रहे नई दिशा
जबलपुर। नगर निगम की विशाल प्रशासनिक व्यवस्था में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान उनके पद से अधिक उनकी कर्मनिष्ठा, व्यवहार-कुशलता और कार्यशैली से होती है। नगर निगम जबलपुर के बाजार विभाग के अधीक्षक श्री राजेंद्र कुमार दुबे ऐसे ही सहज, सरल और कर्मठ अधिकारी हैं, जिन्होंने अपनी कार्यशैली से विभाग में एक अलग पहचान स्थापित की है।
सीमित संसाधनों के बीच दायित्वों का ईमानदारी और निष्ठा से निर्वहन करना उनकी कार्यप्रणाली की विशेषता है। बाजार विभाग में अपनी समस्याएं लेकर आने वाले नागरिकों और व्यापारियों के साथ उनका व्यवहार आत्मीय और सम्मानपूर्ण रहता है। कार्यालय में आने वाले लोगों को सम्मानपूर्वक बैठाना, चाय-पानी से स्वागत करना और धैर्यपूर्वक उनकी समस्याएं सुनना उनकी सहज कार्यसंस्कृति का हिस्सा है।
उनकी कार्यशैली का मूल मंत्र मानो यही है कि समस्या लेकर आए व्यक्ति को पहले सम्मान मिले और फिर समाधान। उनका शांत और सौम्य व्यवहार लोगों को सहज बनाता है और संवाद के माध्यम से समाधान की राह स्वयं प्रशस्त होने लगती है।
37 वर्षों की सेवायात्रा में निगमायुक्त को माना आदर्श
लगभग 37 वर्षों की सेवायात्रा में श्री राजेंद्र दुबे ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहद करीब से देखा है। लंबे अनुभव के बावजूद जब उनके आदर्श अधिकारी के विषय में चर्चा होती है, तो वे वर्तमान निगमायुक्त श्री रामप्रकाश अहिरवार का नाम विशेष सम्मान के साथ लेते हैं।
उनके अनुसार निगमायुक्त श्री रामप्रकाश अहिरवार की कार्यशैली में अनुशासन, दूरदृष्टि, नवाचार और परिणामोन्मुखी सोच का समन्वय है। यही कारण है कि वे निगमायुक्त को अपना आदर्श मानते हैं और उनके मार्गदर्शन में बाजार विभाग को अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
अनुशासन से व्यवस्था की ओर बढ़ता बाजार विभाग
बाजार विभाग में कार्यभार संभालने के बाद श्री दुबे ने अनुशासन और सुव्यवस्था को विशेष प्राथमिकता दी। विभागीय कार्यों में समयबद्धता, उत्तरदायित्व और समन्वय को लेकर उनका दृष्टिकोण स्पष्ट है। उनका प्रयास है कि विभाग की प्रत्येक गतिविधि निर्धारित प्रक्रिया और पारदर्शिता के साथ संचालित हो।
उनकी सोच केवल वर्तमान व्यवस्था तक सीमित नहीं है। नगर निगम की आय में बाजार विभाग की हिस्सेदारी और अधिक सशक्त हो, इसके लिए वे नई कार्ययोजनाओं और नवाचारों पर भी विचार कर रहे हैं। बाजार विभाग की आय बढ़ाने से संबंधित अपनी प्रस्तावित योजना को वे निगमायुक्त श्री रामप्रकाश अहिरवार के समक्ष प्रस्तुत करने की तैयारी में हैं।
राजस्व वृद्धि के साथ समाधान पर भी जोर
श्री राजेंद्र दुबे का मानना है कि किसी भी विभाग की सफलता केवल राजस्व संग्रह से नहीं, बल्कि नागरिकों के विश्वास से भी तय होती है। यही कारण है कि वे विभागीय राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ नागरिकों और व्यापारियों की समस्याओं के समाधान को भी समान महत्व देते हैं।
आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर भी बाजार विभाग प्रकरणों के समाधान के लिए तत्पर है। उनका प्रयास है कि पात्र प्रकरणों का नियमानुसार निराकरण हो और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
सादगी जिनकी पहचान, मुस्कान जिनकी भाषा
श्री राजेंद्र कुमार दुबे के व्यक्तित्व की सबसे विशेष बात उनका सादगीपूर्ण जीवन और सहज व्यवहार है। पद की गरिमा के बावजूद उनके व्यक्तित्व में किसी प्रकार का आडंबर दिखाई नहीं देता। सरल जीवन, उच्च विचार, शांत स्वभाव और चेहरे पर सदैव बनी रहने वाली सहज मुस्कान उनकी पहचान है।
कहा जाता है कि मधुर वाणी और आत्मीय व्यवहार आधी समस्या का समाधान पहले ही कर देते हैं। श्री राजेंद्र दुबे की कार्यशैली इस भाव को साकार करती दिखाई देती है। किसी व्यक्ति की बात ध्यानपूर्वक सुनना, मुस्कुराकर संवाद करना और फिर समाधान की दिशा में आगे बढ़ना—उनकी प्रशासनिक शैली का सहज हिस्सा है।
उनके व्यवहार में न पद का अहंकार दिखाई देता है और न ही औपचारिकता का बोझ। इसके स्थान पर दिखाई देती है विनम्रता, संवेदनशीलता और कर्तव्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता।
पद नहीं, कर्म बनाता है पहचान
नगर निगम की कार्यप्रणाली में श्री राजेंद्र दुबे जैसे अधिकारी यह विश्वास मजबूत करते हैं कि प्रशासन केवल नियमों और आदेशों से नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना, कर्तव्यनिष्ठा और सकारात्मक दृष्टिकोण से भी चलता है।
सीमित संसाधनों में बेहतर परिणाम देने का प्रयास, विभाग में अनुशासन, नागरिकों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार, राजस्व वृद्धि की कार्ययोजना और नवाचार के प्रति सकारात्मक सोच—ये सभी गुण उनके व्यक्तित्व को विशिष्ट बनाते हैं।
निगमायुक्त श्री रामप्रकाश अहिरवार को अपना आदर्श मानकर उनके मार्गदर्शन में बाजार विभाग को नई दिशा देने में जुटे श्री राजेंद्र दुबे की कार्यशैली एक महत्वपूर्ण संदेश देती है—पद व्यक्ति को पहचान देता है, लेकिन कर्म ही उस पहचान को प्रतिष्ठा में बदलता है।
यही कर्मनिष्ठा, सादगी और संवेदनशीलता श्री राजेंद्र दुबे को नगर निगम की कार्यसंस्कृति में एक सहज, प्रभावशाली और अनुकरणीय व्यक्तित्व के रूप में अलग स्थान प्रदान करती है।










