एडीएम शैलेन्द्र सिंह और कलेक्टर राघवेंद्र सिंह लें संज्ञान, 74 वर्षीय बुजुर्ग को मिले न्याय
जबलपुर। 74 वर्षीय बुजुर्ग ने एडीएम शैलेन्द्र सिंह से न्याय की गुहार लगाते हुए रांझी तहसील में सुधीर सोनी के राजस्व निरीक्षक के रूप में कार्यकाल के दौरान धारण अधिकार नियम के तहत उनके पट्टे के संबंध में की गई अनुशंसा की जांच कराने की मांग की है।
बुजुर्ग का कहना है कि धारण अधिकार नियम के तहत नया पट्टा प्राप्त करने के लिए उन्होंने आवेदन किया था। आरोप है कि संबंधित प्रक्रिया में उन्हें लंबे समय तक तहसील और राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े। राजस्व निरीक्षकों पर करीब ₹25 हजार रिश्वत लेने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है। वहीं, अपनी समस्या को लेकर बुजुर्ग CM हेल्पलाइन पर 3-4 बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन लगभग 7-8 महीने बाद भी प्रकरण का समाधान नहीं हुआ।
बुजुर्ग की उम्र और खराब स्वास्थ्य को देखते हुए लगातार कार्यालयों के चक्कर लगाना उनके लिए बेहद कठिन है। उन्होंने RTI के माध्यम से भी प्रकरण की जानकारी मांगी, लेकिन अपेक्षित जानकारी नहीं मिलने की बात सामने आई है।
सुधीर सोनी के कार्यकाल की हो जांच
बुजुर्ग की मांग है कि सुधीर सोनी के राजस्व निरीक्षक के रूप में कार्यकाल के दौरान धारण अधिकार के तहत उनके पट्टे से संबंधित अनुशंसा और पूरी पत्रावली की जांच कराई जाए। फाइल किस स्तर पर चली, क्या अनुशंसा की गई, उसके बाद कार्रवाई क्यों रुकी और वर्तमान में प्रकरण किस स्थिति में है—इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
एडीएम और कलेक्टर से जांच की मांग
74 वर्षीय बुजुर्ग की अपील है कि एडीएम शैलेन्द्र सिंह एवं जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह इस प्रकरण को गंभीरता से संज्ञान में लेकर जांच कराएं। बुजुर्ग से स्वयं मिलकर उनकी पूरी बात सुनी जाए और यदि जांच में किसी अधिकारी-कर्मचारी की लापरवाही अथवा रिश्वत संबंधी आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
जिला प्रशासन द्वारा पट्टा संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और राजस्व अमले को घर-घर भेजने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में इस बुजुर्ग का वर्षों पुराना मामला प्रशासन की संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही की वास्तविक परीक्षा भी है।
सवाल सीधा है—74 वर्षीय बुजुर्ग को न्याय के लिए और कितने चक्कर लगाने पड़ेंगे?










