15 पटवारी निलंबित, 20 आरोपियों पर एक साथ एफआईआर… एमएसपी घोटाले में प्रशासन का प्रहार बना मिसाल, लेकिन जबलपुर में अब तक सन्नाटा क्यों?
जबलपुर। मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर हुए फर्जीवाड़े के खिलाफ मुरैना और भिंड प्रशासन ने जिस तरह की निर्णायक कार्रवाई की है, उसने पूरे प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत कर दिया है। भ्रष्टाचार के विरुद्ध सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को जमीन पर उतारते हुए मुरैना में 15 पटवारियों को निलंबित किया गया, दो तहसीलदारों को नोटिस जारी हुए और 10 सहकारी समितियों के प्रबंधकों एवं कंप्यूटर ऑपरेटरों सहित 20 लोगों के खिलाफ एक साथ एफआईआर दर्ज कराई गई। वहीं भिंड में भी कई पटवारी, तहसीलदार और समिति प्रबंधक जांच के घेरे में हैं तथा बड़े एक्शन की तैयारी चल रही है।
यह कार्रवाई केवल कुछ अधिकारियों के खिलाफ नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था पर करारा प्रहार है, जिसने सरकारी योजनाओं को निजी लाभ का माध्यम बनाने की कोशिश की। वर्षों से किसानों के अधिकारों पर डाका डालने वाले तत्वों के खिलाफ प्रशासन का यह रुख बताता है कि यदि इच्छाशक्ति हो तो भ्रष्टाचार के सबसे मजबूत किले भी ढहाए जा सकते हैं।
दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि बिना फसल बोए फर्जी किसानों के नाम से बाहर का गेहूं खरीदकर एमएसपी पर बेचा गया। इस खुलासे के बाद प्रशासन हरकत में आया और एक के बाद एक कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो गया। मुरैना में निलंबन, नोटिस और एफआईआर के बाद अब भिंड में भी बैंक खाते होल्ड कराए जा रहे हैं तथा दोषियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी है।
अब निगाहें जबलपुर पर…
मुरैना और भिंड की कार्रवाई के बाद अब प्रदेश की जनता की नजर जबलपुर पर टिक गई है। शहर और जिले में समय-समय पर भूमि, राजस्व, सहकारी संस्थाओं, निगम और अन्य विभागों से जुड़ी अनियमितताओं तथा शिकायतों की चर्चा होती रही है। कई मामलों में जांच की बातें भी सामने आईं, लेकिन बड़ी और निर्णायक कार्रवाई के उदाहरण कम ही देखने को मिले।
यही कारण है कि अब आमजन के बीच एक सवाल तेजी से उठ रहा है—क्या जबलपुर में भी भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसा ही कठोर अभियान चलेगा? क्या यहां भी जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर उसी तरह कार्रवाई होगी, जैसी मुरैना और भिंड में हुई?
फाइलों में कैद रहेगी कार्रवाई या टूटेगा मौन?
प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि यदि दूसरे जिलों में घोटालों पर इतनी बड़ी कार्रवाई संभव है, तो जबलपुर में शिकायतों और अनियमितताओं के मामलों में निर्णायक कदम उठाने में देरी क्यों? क्या यहां भी जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होगी, या फिर जांच की फाइलें धूल फांकती रहेंगी?
जनता पूछ रही है…
आज सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि आखिर जबलपुर कलेक्टर भी मुरैना और भिंड की तर्ज पर भ्रष्टाचार के विरुद्ध ऐसी ही कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई कब करेंगे? जनता को उम्मीद है कि यदि कहीं भी सरकारी योजनाओं, राजस्व या सार्वजनिक धन में गड़बड़ी हुई है तो दोषियों पर बिना किसी दबाव के कानून का शिकंजा कसा जाएगा। क्योंकि सुशासन की असली पहचान केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि निष्पक्ष और निर्भीक कार्रवाई से होती है।











