पहले ड्यूटी, फिर नेतागिरी’— निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार के सख्त संदेश से बैकफुट पर कर्मचारी संगठन

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‘पहले ड्यूटी, फिर नेतागिरी’— निगमायुक्त के सख्त संदेश से बैकफुट पर कर्मचारी संगठन

प्रस्तावित ज्ञापन-प्रदर्शन ऐन वक्त पर हुआ निरस्त, अनुशासन पर निगमायुक्त का सख्त रुख बना चर्चा का विषय

उजला दर्पण | जबलपुर

नगर निगम जबलपुर में इन दिनों अनुशासन और जवाबदेही को लेकर निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार की सख्त कार्यशैली चर्चाओं में है। लगातार अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा, समय पर कार्यालय में उपस्थिति तथा जनहित के कार्यों में लापरवाही पर फटकार के बीच कर्मचारी संगठन द्वारा गुरुवार को प्रस्तावित ज्ञापन एवं प्रदर्शन का कार्यक्रम अंतिम समय में निरस्त कर दिया गया। इसके बाद निगम मुख्यालय में पूरे घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं।

सूत्रों के अनुसार, हाल ही में एक कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी ड्यूटी समय में निगमायुक्त से मिलने पहुंचे थे। इस दौरान निगमायुक्त ने उनसे स्पष्ट रूप से पूछा कि यदि कार्यालयीन समय में संगठनात्मक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं तो सरकारी दायित्वों का निर्वहन कब किया जाता है। निगमायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारी नेता होने से सरकारी जिम्मेदारियां समाप्त नहीं हो जातीं। सरकार वेतन काम करने के लिए देती है, इसलिए प्रत्येक कर्मचारी और अधिकारी को निर्धारित समय पर पूरी ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभानी होगी।

इसी घटनाक्रम के बाद कर्मचारी संगठन ने “प्रताड़ना बंद करो, सम्मान करो” के नारे के साथ ज्ञापन एवं प्रदर्शन की घोषणा की थी। आंदोलन के प्रचार-प्रसार के लिए ब्रोशर भी जारी किए गए थे और मांगें पूरी नहीं होने पर आगामी दिनों में काम बंद आंदोलन की चेतावनी भी दी गई थी। हालांकि गुरुवार को निर्धारित समय तक न तो अपेक्षित संख्या में कर्मचारी एकत्रित हुए और न ही प्रस्तावित प्रदर्शन हो सका। अंततः कार्यक्रम निरस्त करना पड़ा।

नगर निगम के अंदर चर्चा है कि निगमायुक्त द्वारा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने, लापरवाह अधिकारियों-कर्मचारियों से जवाब-तलब करने तथा नियमित निरीक्षण और समीक्षा बैठकों में सख्त रवैया अपनाने से कुछ कर्मचारी संगठन असहज हैं। वहीं बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी मानते हैं कि कार्यालय में अनुशासन और जवाबदेही बनाए रखने के लिए ऐसी सख्ती आवश्यक है।

जानकारों का कहना है कि यदि किसी आंदोलन को कर्मचारियों का व्यापक समर्थन नहीं मिलता, तो उसका असर स्वतः कम हो जाता है। गुरुवार को प्रस्तावित प्रदर्शन में सीमित भागीदारी को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है। अब सबकी निगाहें कर्मचारी संगठन द्वारा घोषित आगामी रणनीति पर टिकी हैं।

उधर निगम प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि नगर निगम का पहला दायित्व शहरवासियों को बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनुशासनहीनता स्वीकार नहीं की जाएगी। निगमायुक्त पहले भी कई बैठकों में स्पष्ट कर चुके हैं कि “पहले ड्यूटी, फिर बाकी सभी गतिविधियां”— यही नगर निगम प्रशासन की प्राथमिकता है।

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